दोघट (बागपत)। चर्म शोधन इकाइयों को लेकर भड़ल में आयोजित पंचायत में दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई। एक पक्ष ने कहा किसी भी कीमत पर इकाइयां बंद होनी चाहिए, जबकि दूसरे पक्ष ने कहा गांव से इकाइयां बंद नहीं करेंगे। इस दौरान प्रधान की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी गठित की । इस कमेटी के फैसले के बाद ही दोनों पक्ष अपना अगला कदम उठाएंगे।
बुढ़ाना रोड पर भड़ल के प्राथमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित पंचायत में सर्व समाज के लोग जुटे। इसमें चर्म शोधन इकाइयों को लेकर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और धरने प्रदर्शन पर मंथन किया। वक्ताओं ने कहा चर्म शोधन इकाइयों से गांव में बीमारी फैल रही है। कई लोगों की मौत हो चुकी है। इकाई संचालकों को भी पंचायत में बुलाया, उन्होंने कहा यदि उनका रोजगार बंद हो गया तो परिवार बर्बाद हो जाएंगे। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक भी हुई। गणमान्य लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत किया। मामला सुलझाने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। दोनों पक्षों के पांच-पांच सदस्य रखे और ग्राम प्रधान कमेटी के 11वें सदस्य होंगे। कमेटी ही गांव के इस मसले को सुलझाएगी। ग्राम प्रधान देवेंद्र राणा ने बताया जिला प्रशासन से लेकर सीएम तक मामले की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसकी अध्यक्षता हरबीर सिंह ने की। संचालन मास्टर सुखबीर सिंह ने किया। इसमें सतबीर, डॉ. ओमबीर, सुभाष राणा, इंद्रपाल, रमेश, योगेंद्र, सहेंद्र, देवेंद्र प्रधान, डॉ. यशपाल राणा, जितेंद्र, सीटू, राजेंद्र बढ़ई, मिठ्ठन कश्यप, इसरार कुरैशी, सहन्सर पाल, सहेंद्र ठेकेदार, रामबीर, योगेश, श्याम सिंह, श्याम जैन, रमेश प्रजापति उपस्थित रहे।
दूसरे पक्ष के रविंद्र, विपिन, मास्टर सुखपाल, धर्मपाल, चतरे आदि ने बताया गांव में चर्म शोधन कार्य में करीब 170 परिवार लगे हैं। उन्होंने बताया चकबंदी के दौरान मात्र 19 इकाइयों के लिए भूमि दी थी। उन्होंने कहा यदि इकाइयां बंद हो गई तो सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा यदि जिला प्रशासन चर्म शोधन में लगे परिवार को गांव की आबादी से दूर जंगल में इकाई चलाने के लिए भूमि आवंटित करती है तो हम लोग गांव की इकाई बंद करके जंगल में इकाई स्थापित कर लेंगे। हम लोग भी गांव के लोगों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हैं।
पंचायत में झगड़े की सूचना पर पहुंची पुलिस
पंचायत के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी और झगड़े की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित लोगों को शांत किया। इससे पंचायत का माहौल गर्म हो गया था। पंचायत में कुछ लोगों ने यह भी कहा यदि इकाइयां बंद नहीं हुई तो बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग जाम कर दिया जाएगा।
कब से चल रही हैं इकाइयां
गांव में वर्ष 1958 से चरम शोध इकाइयां चल रही है। कुछ लोग बताते हैं कि जिला प्रशासन ने गांव से बाहर जंगल में इकाइयों को जमीन भी उपलब्ध कराई थी, लेकिन इन इकाइयों के संचालकों ने उक्त जमीन को तो ठेके पर दे दिया और गांव में अपने घरों में ही शोधन करने लगे। इस समय गांव में करीब 25 इकाइयां चल रही हैं। शोधन का जल तालाब के जरिये अब भूजल में घुल गया है। इस कारण हैंडपंपों, सबमर्सिबल पंप आदि के माध्यम से लोग दूषित पानी को पी रहे हैं। इससे सैकड़ों लोग बीमारी के चपेट में आ रहे हैं।