कर्मचारियों की हड़ताल से तीन दिन से बंद हैं मलकपुर चीनी मिल में पेराई
परेशान किसान आज डीएम से मिलेेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। विभिन्न मांगों को लेकर मलकपुर मिल में चल रही कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन यानि रविवार को भी जारी रही। कर्मचारी मांग पूरी होने तक हड़ताल खत्म न करने की जिद पर अड़े हुए है। पेराई बंद होने से मिल क्षेत्र से जुडे़ करीब 50 गांवों के 36 हजार किसान परेशान है। चिंता सता रही है कि गन्ना तौल न होने से गेहूं की बुवाई का संकट बढ़ जाएगा। इसके बावजूद न तो मिल अफसर इस समस्या का समाधान कराने पर ध्यान दे रहा है और न ही प्रशासनिक अमले ने उचित कदम उठाया है। इससे परेशान किसानों ने सोमवार को डीएम से मिलकर समस्या का समाधान कराने का निर्णय लिया है।
चीनी मिल में हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना था कि काफी लंबे समय से उनके प्रमोशन रुके हुए हैं। इसके अलावा जो उन्हें मानदेय दिया जा रहा है वह भी पूर्ण नहीं दिया जा रहा, जबकि 2018 में लिखित समझौता हुआ था। इसका पालन मिल प्रबंधन ने नहीं किय है। कर्मचारियों के इंसेंटिव काटे जा रहे हैं, जिन्हें तुरंत कर्मचारियों को दिया जाएं। इसके अलावा भी मांगे भी हैं, जिन्हें मिल प्रबंधन पूरा नहीं कर रहा है। कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती उनकी हड़ताल जारी रहेगी। इस अवसर पर सोनू, रविंद्र शर्मा, बलराम, देवरत, रविंद्र तोमर उर्फ पप्पू, आलोक, हरिमोहन, देवेंद्र, अरविंद कुमार, अजय आदि रहे। उधर, पेराई बंद होने से परेशान किसानों ने बरवाला गांव में बैठक की। किसान नेता मुनेश बरवाला ने कहा कि मिल न चलने से किसान परेशान है। अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। अब मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोमवार को डीएम से मिलने का निर्णय लिया गया। बैठक में सुभाष, राजवीर, देेवेंद्र, अशोक, धर्मवीर, रामवीर शामिल रहे।
तीन दिन में 2.40 लाख क्विंटल गन्ने की नहीं हो सकी पेराई
चीन मिल के गन्ना प्रबंधक मुकेश मिल के अनुसार मिल की प्रतिदिन की क्षमता 80 हजार क्विंटल पेराई करने की है। तीन दिन से मिल बंद है, इसलिए अब तक 2.40 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई नहीं हो सकी।
समझौते का प्रयास कर रहा प्रशासन
एसडीएम सुभाष सिंह का कहना था कि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर व्यस्त था। बताया कि शुक्रवार व शनिवार को मिल पहुंचकर मिल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच समझौता का प्रयास किया था, लेकिन वार्ता विफल रही। फिर भी दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों की समस्या को लेकर भी प्रशासन गंभीर है।