खेकड़ा (बागपत)।
नगर में स्थित सीएचसी पर बधिर बच्चों के लक्षण, पहचान व उपचार को लेकर आंगनबाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। साथ ही समय से बच्चे की पहचान कर उपचार दिलाने का संकल्प दिलाया।
नगर में स्थित सीएचसी में सोमवार को महिला चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका कसाना ने आंगनबाड़ियों को बधिर बच्चों के लक्षण, पहचान व उपचार हेतु प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि बहरापन के कारण बच्चा बोलना सीख नहीं पाता। यदि इस समस्या को जल्दी पहचान सकते हैं तो इलाज अवश्य संभव है। बताया कि भारत में हर हजार बच्चों में दो बच्चे बहरे होते हैं। आनुवंशिक दोष, इसमें ममेरे या चचेरे रिश्तों में शादी, भिन्न ब्लड ग्रुप के कारण जन्म के समय दोष पैदा होना, बच्चों में गलत दवा का प्रयोग, प्रसव में गड़बड़, समय पूर्व याने कम हफ्तों का शिशु आदि इसके कारण माने जाते हैं। यदि कोई भी बच्चा ताली के आवाज से चौंकता है। जन्म के बाद पहले हफ्ते में ही इसको हम परख सकते हैं। तीन माह तक बच्चा आवाज की तरफ से आंख मोड़ता है। यह तथ्य तो हम भी परख सकते हैं। यदि कोई संदेह हो तो बच्चे को सीएचसी में ले जाकर जांच कराए। तभी बच्चे को ठीक रखा जा सकता है। इस दौरान बबीता, संगीता, बेबी, पुष्पा, मीनाक्षी, ममता, सोनिया, सीमा, सुनीता, संतोष, नेहा, मंजू आदि रही।