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गाधी के ग्रामीणों ने आवारा गोवंश पंचायतघर में बंद किए

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बागपत।
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बुढेड़ा गांव में ग्रामीणों ने तीन दिन बाद पकड़े गए बेसहारा 70 गोवंशीय पशुओं को छोड़ दिया। जबकि गाधी गांव में ग्रामीणों ने आवारा गोवंशीय पशुओं को पकड़कर पंचायत घर में बंद कर दिया। वहीं क्यामपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में तीन दिन से आवारा गोवंशीय पशु बंद हैं। किसी ने उनकी सुध नहीं ली। भूख के कारण छह गोवंशीय पशु बीमार हो गए। प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा है। अधिकारियों ने गोवंश को गोशाला में भिजवाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
बिनौली थाना क्षेत्र के बुढेड़ा गांव में तीन दिन पहले बली पुत्र राजाराम के घेर में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे 70 गोवंशीय पशुओं को पकड़ कर बंद कर दिया था। शनिवार को ग्रामीणों ने पशुओं को छोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन स्तर पर गोवंश को गोशाला भिजवाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण/ प्रधानाचार्य चौधरी कृष्णपाल, अरविंद, मनवीर ने बताया कि पशु भूख के कारण बीमार न हो जाए, इस लिए उन्हें छोड़ दिया।
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बागपत कोतवाली क्षेत्र के गाधी गांव में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे बेसहारा गोवंशीय पशुओं को पकड़ कर ग्रामीणों ने पंचायत घर में बंद कर दिया। ग्रामीण राजेश, श्रीराम, सूरज, पंकज, मनोज, रामबीर, रामकुमार आदि का कहना है कि जब तक इन्हें गौशाला में नहीं भिजवाया जाएगा, गोवंश को नहीं छोड़ेंगे। पशुओं के लिए ग्रामीणों ने चारे, पानी की पूरी व्यवस्था कर दी है। उधर क्यामपुर गांव में प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में तीन दिनों से आवारा गोवंशीय पशु बंद है। प्रशासनिक अधिकारी ने पहुंचकर उनकी सुध नहीं ली। भूख के कारण छह गोवंशीय पशु बीमार हो गए। ग्रामीणों ने पशु चिकित्सकों को सूचना दी, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि एक भी गोवंशीय पशु की मौत हुई तो इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा। ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में पशु चिकित्सक राजपाल सिंह ने बताया कि टीम भेजकर बीमार गोवंशीय पशुओं का इलाज कराया जाएगा।

जिले में गेहूं की फसल को खतरा
बागपत। जिले में गेहूं की फसल को आवारा गोवंशीय पशुओं से खतरा है। भूखे गोवंशीय पशु मौका मिलते ही गेहूं की फसल खा जाते हैं। किसान रात भर जाकर गेहूं की फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। बागपत के महेेंद्र सिंह ने बताया कि बेसहारा गोवंशीय पशुओं से गेहूं की फसल को ज्यादा खतरा है। किसान कब तक खेतों की रखवाली करेगा। खेत से हटते ही गोवंशीय पशु फसल बर्बाद कर देते हैं। बड़ौत निवासी कविंद्र का कहना है कि आवारा गोवंश को गोशाला में भिजवाया जाए। प्रशासन भी इसके प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। यदि गोवंशीय पशुओं को नहीं पकड़ा गया तो गेहूं की फसल नहीं होगी।
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थाने और स्कूल में गोवंशीय पशुओं को बंद करने की चेतावनी
दोघट (बागपत)। कस्बे की पट्टी भोजान में रोहताश के आवास पर किसानों की बैठक हुई। अध्यक्षता करते हुए सोराज सिंह ने कहा कि किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है। खेतों में बेसहारा गोवंशीय पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। फसलों का वाजिब दाम भी नहीं मिला रहा है। किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। गांव-गांव गोवंशीय पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। यदि इन्हें खेतों से निकालने का प्रयास करते हैं तो ये किसानों पर हमला कर देते हैं। प्रशासन शिकायत के बाद भी किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में बेसहारा गोवंशीय पशुओं का प्रबंध नहीं किया तो ग्रामीण पशुओं को गांधी स्मारक इंटर कॉलेज और थाने में बंद कर देंगे। संचालन यशपाल सिंह ने किया। इसमें सतवीर, ओमवीर, जगपाल, रणपाल, इंद्रपाल, रणवीर, मनोज, सनव्वर, मुंशी, जगमेहर, आशु, विकास पंवार, सतेंद्र पहलवान, उदयवीर, रामपाल, गौतम, जोगिंद्र, नीलू, रामेहर आदि रहे।
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