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गौरीपुर मोड़ से सरूरपुर के बीच फोरलेन बनाने का कार्य शुरू

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बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का निर्माण कार्य पहले चरण में बागपत से शामली बाईपास तक प्रस्तावित है। शुरूआत में गौरीपुर मोड़ से सरूरपुर कलां के बीच चौड़ीकरण का कार्य आरंभ किया। गांव सरूरपुर से बड़ौत के बीच कई जगह मिट्टी के भराव का कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। अभी तक हाईवे किनारे की बिजली की लाइन भी शिफ्ट नहीं की जा सकी है, इससे मार्ग के चौड़ीकरण के कार्य की रफ्तार धीमी है।
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वेस्ट यूपी के चार जिलों को जोड़ने वाले दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के निर्माण कार्य का शुभारंभ केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने किया। गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरने वाले दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के 155 किमी का निर्माण होना है। पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के मवी कलां इंटर चेंज से शामली बाईपास तक 61.409 किमी के टुकड़े का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। निर्माण कार्य गौरीपुर मोड़ और बड़ौत के बीच शुरू किया। फोरलेन का निर्माण पहले गौरीपुर मोड़ से सरूरपुर कलां और फिर यहां से बड़ौत तक किया जाएगा। हाईवे का सबसे अधिक चौड़ा हिस्सा भी यहीं पर है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह का कहना है कि निर्माण शुरू हो गया है। लोगों को आवागमन में लाभ होगा और जिले की पुरानी समस्या से निजात मिलेगी।


पहले चरण की लागत 726 करोड़
बागपत। पहले चरण में यह शामली बाईपास तक होना प्रस्तावित है। 61.409 किमी के हिस्से की अनुमानित लागत 726.33 करोड़ है। शामली बाईपास से सहारनपुर तक मार्ग की लंबाई 62.779 है, इसकी अनुमानित लागत 779.39 करोड़ है।
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51 किमी और 455 करोड़ का घपला
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के निर्माण में 455 करोड़ रुपये के मामले की जांच चल रही है। जिले से करीब 51 किमी के टुकड़ा है, लेकिन गड्ढे और मार्ग तंग होने के कारण यहां से गुजरना आसान नहीं है। पहले फोर लेन प्रस्तावित हाईवे पर निर्माण की शुरूआत 30 मार्च 2012 को हुई । ठेकेदार कंपनी के डायरेक्टरों सहित अन्य लोगों के खिलाफ 455 करोड़ के घपले का मुकदमा दर्ज किया। नवंबर 2013 में यहां भी काम रोक दिया। इसके बाद कोई कार्य नहीं किया।


राह में हैं कई रुकावटें
बागपत। हाईवे के निर्माण तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। इसमें कई रुकावटें हैं। बिजली की लाइन अभी तक शिफ्ट नहीं की गई है। कई जगह पेड़ कटान का कार्य होना है। यही वजह है कि निर्माण कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
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