बागपत। भगवान आशुतोष की भक्ति में चूर कांवड़िया श्रद्धा के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। न गर्मी की बाधा कांवड़ियों के भक्ति मार्ग में बाधा है और न ही सड़कों के गड्ढे। बायवाला से लेकर गौरीपुर तक कांवड़ियों की कतार लगनी शुरू हो गई है। हाइवे केसरिया रंग में रंगता जा रहा है।
जिला केसरिया रंग में रंगना शुरू हो गया है। कांवड़ मार्गों पर भक्ति की रस धार बह रही है। भगवान आशुतोष के जयकारे लगाए जा रहे हैं। जिले में बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग, दाहा-बरनावा मार्ग और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ रही है। जिले में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। कई जगह सड़क पर गड्ढे हैं, लेकिन इसके बावजूद कांवड़िया आगे बढ़ते चले जा रहे हैं।
मन्नत के लिए शिव की साधना
बागपत। उम्र की बाधा भी भोले की भक्ति को नहीं डिगा रही है। उम्र 60 के पार होने के बावजूद सैकड़ों किलोमीटर लंबी दूरी को तय कर भगवान आशुतोष के दरबार में अर्जी लगा रहे हैं। दर्जनों महिलाओं ने केवल भगवान की भक्ति के लिए कांवड़ लाने की लालसा दिखाई दी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले के कालेट गांव की बुजुर्ग महिला हरिद्वार से कांवड़ में गंगा जल लेकर आ रही है। महिला ने कहा पौत्र के लिए वह कांवड़ लेकर आई है। निर्मला ने कहा कि भगवान का दिया घर में सब कुछ है, उन्हें कुछ नहीं चाहिए। केवल भोले में आस्था है इस लिए कांवड़ लाते है। 62 वर्षीय महिला कृष्णा ने कहा कि भोले से कुछ नहीं मांगा। पहले ही सभी मनोकामना पूरी कर रखी है। वह कई बार कांवड़ ला चुकी है।
दाहा में भोले के भक्तों की सेवा
दाहा। क्षेत्र में भोले के भक्तों की सेवा की जा रही है। ग्रामीणों ने जगह-जगह कांवड़ सेवा शिविर लगाए हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रहे कांवड़ियों की सेवा की जा रही है। क्षेत्र के कांवड़िया गंगाजल लेने के लिए रवाना होने शुरू हो गए हैं। क्षेत्र से इन दिनों हरियाणा और राजस्थान जाने वाले कांवड़िया गुजर रहे हैं।