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इस बजट से हमें क्या लाभ?

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बागपत। एक तरफ वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट पेश कर रहे थे और दूसरी तरफ घरों, बाजारों, नुक्कड़ों और चौराहों पर चल रही थी बजट की चर्चा। शहर में डॉक्टर से लेकर पंसारी तक बजट से मायूस दिखे। व्यापारियों को उम्मीद थी कि जीएसटी के स्लैब में परिवर्तन होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गृहणियों को उम्मीद थी कि कहीं न कहीं रसोई के बजट का बोझ कम होगा, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।
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गांधी बाजार में पंसारी की दुकान चलाने वाले आलोक कुमार ग्राहकों को सामान दे रहे थे। बजट का सवाल पूछते ही कहा, बजट से उन्हें या उनके जैसे दुकानदारों को क्या लाभ हुआ है। जीएसटी स्लैब कम होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे आम दुकानदार या छोटे व्यापारी को कोई राहत नहीं मिलती दिख रही।
गांधी बाजार में ही हलवाई की दुकान चलाने वाले हिमांशु कहते हैं कि मध्यम वर्ग का व्यापारी जीएसटी से परेशान हैं। इस पर कटौती की जानी चाहिए थी। बजट में उन जैसे दुकानदारों के लिए कोई राहत नहीं है।
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सराफा बाजार में सर्राफ नरेश वर्मा कहते हैं कि जीएसटी तीन फीसदी से दो फीसदी करने की उम्मीद थी। सोने के भी दाम बढ़ने की संभावना है, इसका सीधा असर उनके रोजगार पर पड़ेगा। शादी का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में बाजार को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।
मेरठ रोड पर इनकम टैक्स के अधिवक्ता सुधीर कुमार जैन कहते हैं कि मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि इनकम टैक्स का स्लैब ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे मध्यम वर्ग को बड़ा झटका है।
मेरठ रोड पर मेडिकल सेंटर चलाने वाले डॉ वीबी जैन कहते हैं कि आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए डायलिसिस मुफ्त करने का एलान किया गया है। कुछ जीवन रक्षक दवाईयों के दाम कम होंगे, इससे आंशिक राहत ही मिलेगी।
बड़ौत में रिम धुरा उद्योग चला रहे सचिन जैन का कहना है कि उद्योग की उम्मीद टूट गई है। कृषि यंत्रों पर वर्तमान में जीएसटी 18 फीसदी है, इसके 12 फीसदी तक आने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में उनके उद्योग पर बजट से कोई फर्क पडने वाला नहीं है।
बड़ौत रोड निवासी गृहणी सीमा चौधरी कहती हैं कि रसोई के लिए कोई राहत नहीं। महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। बल्कि टीवी और मोबाइल के दाम बढ़ाए जाने से मध्यम वर्ग को नुकसान ही होगा। सरकार को महिलाओं के लिए अलग से घोषणा करनी चाहिए थी। घर और रसोई के पैमाने से देखें तो बजट निराशाजनक है।
जेवी कॉलेज बड़ौत में प्रोफेसर डॉ नरेंद्र कुमार कहते हैं कि इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड रिडक्शन छूट को दस हजार रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया गया है, इसे कम बढ़ाया गया है। जमा राशि पर मिलने वाली छूट को दस हजार रुपये से बढ़ाकर सिर्फ 50 हजार रुपये किया गया है। शिक्षा का बजट बेहद कम रखा गया है।

मध्यम वर्ग की हालत खस्ता होगी
बागपत। मेरठ रोड स्थित मार्केट के बाहर शिक्षा, नौकरी और अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोग बैठे हैं। कौशिक सुखबीर सिंह एडवोकेट कहते हैं कि ऐसा बजट होना चाहिए, जिससे देश के आम से आम आदमी को लाभ मिले। बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखा। सेवानिवृत्त शिक्षक श्रीपाल भारद्वाज और कृष्ण कुमार शास्त्री, इंजीनियर आर्य कौशिक और रिटायर्ड सैनिक सुभाष कहते हैं कि बजट से मध्यम वर्ग को कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है।
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