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मनुष्य शरीर एक मंदिर है, इससे खंडहर न बनाएं- अरूण मुनि

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मनुष्य शरीर एक मंदिर है, इसे खंडहर न बनाएं : अरुण मुनि
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बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए आत्मा के साथ शरीर की सुरक्षा भी आवश्यक है। वे सोमवार को जैन स्थानक शहर में धर्मसभा में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ न करो, ताकि शरीर खंडहर न बन जाए। पोस्ट बाक्स का मुंह हर समय खुला रहता है। मनुष्य का मुंह भी खुला है, उसमें भी हर समय हम ढूंढते रहते हैं। आज मंदिर को खंडहर बना रहे हैं। मनुष्य का शरीर भी एक मंदिर के समान है। उसे खंडहर मत बनाएं। मनुष्य जितना संकल्प विकल्प करता है उतना ही दुख अधिक होता है। उन्होंने कहा कि शरीर साधना, सेवा समाद्धि के लिए मिला है, न कि भोग विलास के लिए। भगवान के जीवन में झांक कर उनकी जीवन शैली भाषा शैली, विचार शैली, व्यवहार व आहार शैली को देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मा को भी जब पाया जाता है, तब शरीर होता है। शरीर मेें ही आत्मा निवास करती है, बिना शरीर की आत्मा को भूत प्रेत कहते हैं। इससे पूर्व सभा में अमन मुनि ने विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश, सोहनपाल, राजीव, नरेश जैन, हंसकुमार जैन, दीपक, अजय, कालू, शहरबाला, सविता, इंद्रिणा, मोनिका शामिल रहे।
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