बागपत। जिला पंचायत में चार साल से पूरा बजट खर्च नहीं हो रहा है। कभी सदस्यों व अध्यक्ष में खींचतान होती रही तो कई बार कार्य योजना तक नहीं बन सकी। इसलिए अब आखिरी साल में 30 करोड़ रुपये खाते में एकत्र हो गए हैं। एक साल बाद पंचायत चुनाव होने हैं और ऐसे में अध्यक्ष व अधिकारी बजट खर्च करने को जोर लगा रहे हैं। मगर बजट खर्च करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
जिला पंचायत में हर साल करीब 15 करोड़ रुपये बजट मिलता है। यहां ममता किशोर को वर्ष 2021-22 में अध्यक्ष की कुर्सी मिली थी और तब जिला पंचायत का खजाना पूरी तरह से खाली थी। उसके बाद बजट मिलना शुरू हुआ और किसी भी वित्तीय वर्ष में वह पूरा खर्च नहीं हो सका।
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यहां कई साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्यों में खींचतान होती रही और अध्यक्ष पर विकास कार्य नहीं कराने के आरोप लगते रहे। ऐसा भी रहा कि वर्ष 2024-25 में कार्य योजना को मंजूरी तक नहीं मिल सकी। कार्य योजना को मंजूरी मिले बिना बजट खर्च नहीं किया जा सकता है।
इस तरह चार साल में पूरा बजट नहीं खर्च होने से अब जिला पंचायत के खाते में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हो गए हैं। वहीं अब चुनावी साल भी शुरू हो गया है और वित्तीय वर्ष के साथ ही अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो जाएगा।
इस तरह बजट खर्च करने के लिए केवल एक साल बाकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब चार साल में बजट खर्च करने के लिए अध्यक्ष व अधिकारी जूझते रहे तो अब एक साल में इतना बजट कैसे खर्च कर सकेंगे। इस जुगत में अध्यक्ष ममता किशोर व अधिकारी लगे हुए हैं।