भूपटल योजना के अंतर्गत जिले के दो ब्लॉक में होगा तालाब और वाटर हार्वेस्टिंग प्लाट का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जल संरक्षण के प्राकृतिक स्रोत हाल बेहाल हैं। अधिकतर पर कब्जे कर लिए गए हैं। तालाबों पर अतिक्रमण हैं। कुएं अब नहीं रहे। प्राकृतिक स्रोतों को क्षति पहुंचाए जाने के कारण अब भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
सरकारी आंकड़ा में जिले पांच बीघा या इससे अधिक रकबे के 248 तालाब है। इनमें से अधिकांश तालाबों पर लोगों का कब्जा है। तालाबों पर अतिक्रमण होने के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। जिले को भूजल अटल योजना में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत जिले के दो ब्लॉक में 38 तालाब व 62 वाटर हार्वेस्टिंग प्लांटों का निर्माण कराया जाएगा। पानी के लगातार हो रहे दोहन के कारण जिले के सभी ब्लॉक को डार्क जोन घोषित किया हुआ है। आंकड़े बताते है कि अत्यधिक दोहन के कारण जिले का जल स्तर प्रतिवर्ष 70 सेंटीमीटर तक घट रहा है। अगर हालात नही सुधरे तो आने वाली पीढ़ी के लिए समस्या हो सकती है।
जिले में 248 तालाब ऐसे है जिनका रकाबा पांच बीघा या इससे अधिक है। इन तालाबों पर लगभग 70 फीसदी पर अतिक्रमण है। अतिक्रमण होने के कारण भूजल स्तर घटने के साथ पानी की निकासी की भी समस्या है। - विपिन त्यागी, जेई, लघु सिंचाई विभाग।
अटल भूजल योजना में होगी 38 तालाबों की खोदाई
बागपत। जिले को भूजल योजना में शामिल किया गया है। योजना के तहत जिले के बागपत व पिलाना ब्लॉक में 38 तालाबों की खोदाई कराई जाएगी। योजना के तहत शीघ्र ही कार्य योजना तैयार कर खोदाई का काम शुरू कराया जाएगा।
6 तालाबों की मनरेगा में कराई सफाई
बागपत। परियोजना निदेशक वीएन शुक्ला ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत पिलाना व बागपत ब्लॉक के छह तालाबों की सफाई कराई गई है। इनमें अहमदपुर गठिना, गवालीखेड़ा, लाधवाड़ी, सिसाना, पिलाना, हिसवादा गांव के तालाबों की सफाई कराई गई है। योजना के अंतर्गत समय समय पर तालाबों की सफाई कराई जाती है।