बागपत। जनता के फैसले के सामने सारे राजनीतिक कयास धड़ाम हो गए। रालोद के गढ़ में 24 साल बाद भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। बागपत सीट से भाजपा के योगेश धामा ने बसपा के अहमद हमीद और बड़ौत से भाजपा के केपी मलिक ने रालोद के साहब सिंह को बड़े अंतर से हराया। छपरौली में रालोद के सहेंद्र सिंह रमाला ने भाजपा के सतेंद्र सिंह तुगाना को नजदीकी अंतर से हराकर सीट बचा ली। जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। चुने गए विधायकों के घर होली खेली गई।
शनिवार को विधानसभा चुनाव के नतीजों में खूब कमल खिला। इससे पहले वर्ष 1993 में बरनावा सीट से भाजपा के टिकट पर त्रिपाल सिंह धामा पहली बार विधायक चुने गए थे। विधानसभा में बागपत से दोबारा कमल खिलने में चौबीस साल लगे। इस बार बागपत सीट से भाजपा के योगेश धामा (92566) ने बसपा के अहमद हमीद (61206) को 31360 वोटों के अंतर से हराया। बड़ौत सीट पर केपी मलिक (79,427) ने रालोद के साहब सिंह (52941) को 26486 वोटों के अंतर से हराया। छपरौली सीट पर रालोद के सहेंद्र सिंह रमाला (65124) ने भाजपा के सतेंद्र सिंह तुगाना (61282) को 3842 वोटों के अंतर से पछाड़ दिया। दो सीटों पर भाजपा की जीत के बाद जश्न का माहौल है। योगेश धामा के समर्थकों ने दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर एकत्र होकर जश्न मनाया। डीएम ह्दय शंकर तिवारी और एसपी अजय शंकर राय ने धामा से बातचीत कर यहां से समर्थकों को बमुश्किल हटाया। चुने गए विधायकों के घर होली खेली। रमाला, बागपत और बड़ौत में विधायकों के समर्थकों ने खूब गुलाल उड़ाया।
लोकसभा में दो बार खिल चुका कमल
भाजपा ने यहां दो बार रालोद को हराया है। वर्ष 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री ने भारतीय किसान कामगार पार्टी से चुनाव लड़े पूर्व मंत्री अजित सिंह को हराया था। शास्त्री को मिले थे 26,4736 वोट, जबकि अजित सिंह को मिले थे 220030 वोट। इसके बाद यहां वर्ष 1999 में हुए चुनाव में अजित सिंह जीते और सोमपाल शास्त्री हार गए, लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के सत्यपाल सिंह ने फिर से अजित सिंह को हराकर बड़ी कामयाबी हासिल की थी।
मंत्री और विधायक तक नहीं बचा पाए जमानत
बागपत। विधानसभा चुनाव में रालोद, बसपा और कांग्रेस की सबसे ज्यादा किरकरी हुई। इनके कई प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। वहीं, निर्दलीय और छोटे दलों के एक उम्मीदवार को छोड़ दें तो बाकी तो एक हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए हैं। खेकड़ा के लख्मीचंद पटवारी कॉलेज में तीनों विधानसभा सीटों के लिए मतगणना हुई। ईवीएम के पिटारे से पहले से लेकर अंतिम राउंड तक वोटों की गिनती समाप्त हुई। हालांकि चौंकाने वाले नतीजे सामने आने लगे। बड़ौत और बागपत विधानसभा सीट से बसपा, रालोद और सपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। छपरौली में छह छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी में एक को छोड़कर बाकी कोई भी एक हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। बड़ौत बसपा विधायक लोकेश दीक्षित अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए हैं। चार छोटे दलों के प्रत्याशी पांच सौ के दायरे में सिमटकर रह गए। बागपत में रालोद के करतार सिंह भड़ाना और सपा-कांग्रेस के गठबंधन प्रत्याशी दर्जा प्राप्त मंत्री रहे डॉ. कुलदीप उज्ज्वल की सबसे ज्यादा किरकरी हुई है, जो कि 19-20 हजार वोट ही हासिल कर सके। यहां पर नौ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी पांच और आठ सौ के बीच ही वोट हासिल कर सके।