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किसानों को क्रेडिट कार्ड का तोहफा देहकर विदा हुए अटल

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बागपत। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मंत्रिमंडल में शामिल रहे सोमपाल शास्त्री कहते हैं कि उनके फैसले किसान हितैषी थे। किसानों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा अटल बिहारी वाजपेयी ने ही शुरू की। गेहूं का समर्थन मूल्य 19.6 प्रतिशत बढ़ाकर इतिहास रचा। चीनी मिलों की लाइसेंस प्रणाली से मुक्त किया और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तैयार कराई।
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बागपत से सांसद रहे पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री सोमपाल शास्त्री बताते हैं कि वर्ष 1998-99 में वाजपेयी ने गेहूं का समर्थन मूल्य 460 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 550 रुपये प्रति क्विंटल किया। यह बढ़ोत्तरी 19.6 प्रतिशत रही। इससे पहले और आज भी एक साथ इतनी बढ़ोत्तरी नहीं हुई। चीनी मिलों को लाइसेंस प्रणाली से मुक्त करने का एतिहासिक फैसला किया। फैसले से पहले किसान का सिर्फ 55 फीसदी गन्ना ही चीनी मिलों पर जाता था, बाकी गन्ना कोल्हू और खांडसारी इकाइयों का जाता था। इससे किसान को आर्थिक चोट लगती थी। चीनी मिलें बढ़ी और किसान का अब 90 फीसदी से ज्यादा गन्ना चीनी मिलों को जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड की व्यवस्था ऐतिहासिक रही। रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने हाथ खड़े कर दिए थे। प्रधानमंत्री के पास कृषि मंत्री का पद भी था। उनके साथ दस बार बैठकों का दौर चला। रिजर्व बैंक बार-बार मना करता रहा, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रक्रिया को पूरी तरह समझकर इसे किसान हित का बड़ा कदम मानते हुए क्रेडिट कार्ड व्यवस्था की शुरूआत की। इससे पहले भाजपा ने वर्ष 1993, 1996 और 1998 के घोषणा पत्र में क्रेडिट कार्ड की सुविधा देने का एलान किया। वाजपेयी का चौथा एतिहासिक कदम था राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना। वर्तमान में प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना में हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से तैयार कराई गई बीमा योजना के कई प्रावधान हटा लिए हैं, लेकिन इसके बाद भी यह किसान हित में है।


वाजपेयी ने अपने पास रखा था कृषि मंत्रालय
बागपत। सोमपाल शास्त्री बताते हैं कि वह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने अपने पास कृषि मंत्रालय रखा । उन्हें कृषि राज्यमंत्री बनाया और किसान हित में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। वह किसानों की चिंता करते थे।
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वाजपेयी ने जिताया था बागपत का किला
बागपत। पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री सोमपाल शास्त्री बताते हैं कि बागपत में उनकी जीत का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व को भी जाता है। भाजपा में शामिल होने से पहले वह वर्ष 1997 तक साढ़े सात साल तक जनता दल में रहे। वाजपेयी ने उन्हें बुलाया, भाजपा में शामिल किया। यही नहीं चुनाव लड़ाया और हमेशा उनके ऊपर भरोसा कायम रखा। चीजों को समझकर वह हमेशा एतिहासिक फैसले लेते थे।

अटल ने भेजा था सद्दाम हुसैन से वार्ता के लिए
बागपत। सोमपाल शास्त्री बताते हैं कि इराक से विदेशी नीति के मसलों पर वाजपेयी ने उन्हें सद्दाम हुसैन से बातचीत के लिए भी भेजा था। हालांकि वह विदेश मंत्री नहीं थे, लेकिन वाजपेयी उनके ऊपर पूरा भरोसा करते थे। नौ बार विदेश यात्राएं कराई और हमेशा मार्गदर्शन किया।
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