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बामनौली में 17 साल तक चक सृजन का चला कार्य

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दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में 17 साल से अधिक समय तक केवल सहायक चकबंदी अधिकारी स्तर पर ही चक सृजन और बार-बार उनको रिमांड करने का कार्य किया जाता रहा। चकबंदी प्रक्रिया में अनावश्यक असाधारण विलंब हुआ। चकबंदी अधिकारियों द्वारा त्रुटि पूर्ण चक सृजन किए । इसका खुलासा पूर्व प्रधान द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी सूचना में हुआ।
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बामनौली गांव के पूर्व प्रधान महीपाल सिंह ने गांव में हुई चकबंदी प्रक्रिया की जांच के लिए भेजी तीन सदस्य टीम द्वारा की गई जांच के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत चकबंदी आयुक्त कार्यालय से सूचना मांगी । जिस पर चकबंदी आयुक्त लखनऊ से उन्हें 703 पेज का जवाब प्राप्त हुआ । इसमें कई चकबंदी अधिकारियों द्वारा की गई खामियों का खुलासा किया । गांव में 1981 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई। पहली बार केवल भूमि प्रबंध कमेटी के कुछ सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर फर्जी तरीके से चकबंदी कमेटी का चुनाव संपन्न दर्शा दिया। इसको बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा निरस्त करने के कारण 1982 में चकबंदी कमेटी के चुनाव द्वारा गठन किया गया। 1985 में चकों की कीमत लगाई, जो गलत तरीके से लगाई गई । 1988 में चक काटने की प्रक्रिया शुरू हो गई । चक आवंटन का कार्य लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो गया और गांव के कुछ भूमाफिया के अतिरिक्त विशेषकर छोटे किसान काफी संतुष्ट रहे।
सहायक चकबंदी अधिकारी ने अंतिम चक आवंटन की कार्रवाई की, लेकिन गांव के कुछ भूमाफिया ने अपना स्वार्थ सिद्ध न होता देखकर तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी का स्थानांतरण करा दिया। 1991 में दूसरे सहायक चकबंदी अधिकारी आए और उन्होंने सेक्टर नंबर एक से चक आवंटन की कार्रवाई शुरू कर दी, जो अनुचित थी। धारा-20 का प्रकाशन किया। सहायक चकबंदी अधिकारी ने चक आवंटन में काफी धांधली की। अंत में सतर्कता अधिष्ठान द्वारा जांच करने पर काफी कमियां पाई और विभाग ने चक आवंटन की कार्रवाई को निरस्त किया। इसके बाद 2004 में पुन: चक निर्माण कार्य प्रारंभ किया और 2005 में चक निर्माण का कार्य पूर्ण करके धारा 20 का प्रकाशन किया । इस तरह 1988 से लेकर 2005 तक 17 वर्ष से अधिक समय केवल सहायक चकबंदी अधिकारी स्तर पर चक सृजन और रिमांड करने का कार्य किया जाता रहा।
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कम हो गया रकबा
दोघट (बागपत)। वर्तमान चकबंदी के रिकार्ड के अनुसार गांव का बंदोबस्त रकबा 1288.3240 हेक्टेयर था, लेकिन अब 1265.3435 हेक्टेयर पाया गया है। 22.9805 हेक्टेयर जमीन किसानों के खातों से कम हो गई है।

चकबंदी समस्याओं में हुई वृद्धि
दोघट (बागपत)। चकबंदी अधिकारी के स्वयं स्थल का निरीक्षण न किए जाने के कारण गाटों का विनियम अनुपात निर्धारण और गाटों पर स्थित पेड़, कुएं व अन्य समुन्नितयों के मूल्यांकन में गंभीर विसंगति उत्पन्न हो गई और गांव के किसानों की चकबंदी संबंधी समस्याओं में विशाल वृद्धि हुई।

नियम के खिलाफ करते रहे कार्य
दोघट (बागपत)। 2005 में चकबंदी आयुक्त और 2007 में उच्च न्यायालय द्वारा बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी बागपत और मेरठ को स्पष्ट रूप से नियमानुसार कार्य करने के साथ-साथ अन्य हिदायतें भी दी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने पत्र पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपनी इच्छानुसार नियमों के विरुद्ध कार्य करते रहे।

हड़बड़ी में किया धारा-20 का प्रकाशन
दोघट। वर्तमान में गांव में कार्यरत चकबंदी स्टाफ से धारा-20 के प्रकाशन के समय कृषकों द्वारा हस्ताक्षरित प्राप्त की प्रति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसे वे लोग प्रस्तुत नहीं कर सके। एक दिन में 4400 चकबंदी आकार पत्रों में जांच सहित हस्ताक्षर करना व्यवहारिक रूप में असंभव है। प्रकाश अत्यंत हड़बड़ी में और किसानों से बिना परामर्श किए हुए किया। कारण कृषकों की समस्याएं और भी विकराल हो गई है। जिसके लिए चक सृजित करने वाले सहायक चकबंदी अधिकारी दोषी है।
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