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ये दौर तो झगड़े और शराब का है

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बड़ौत (बागपत)। नगर निकाय चुनाव के मतदान मेें तीन दिन शेष हैं। जगह-जगह लोग प्रत्याशी कैसा होना चाहिए, कौन जीतेगा, कौन हारेगा आदि बातों पर चर्चाएं कर रहे हैं। उधर, बुजुर्गों का कहना है कि उनके समय में प्रत्याशियों का ध्यान सिर्फ विकास कार्यों पर होता था, अब तो लोग चुनाव सिर्फ पैसा कमाने के लिए लड़ते हैं।
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बुजुर्ग हरपाल दरोगा का कहना था कि समय के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है। हमारे दौर में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से लड़ा जाता था। प्रत्याशी चुनाव-प्रचार पर पैसे बिल्कुल भी खर्च नहीं करते थे, जीतने के बाद प्रत्याशी का ध्यान सिर्फ विकास कार्यों पर रहता था, आज के दौर में चुनाव जीतकर प्रत्याशी सिर्फ अपना घर भरता है, विकास पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।
ईश्वर सिंह का कहना था कि पहले चुनाव लड़ने के लिए कोई आगे नहीं आता था। गांव व नगर की जनता ही किसी एक व्यक्ति को सर्वसम्मत्ति से चुनती थी और स्वयं खर्च कर चुनने हुए व्यक्ति को चुनाव लड़ाते थे। अब एक साथ दर्जनों प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर जाते थे।
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बुजुर्ग इंजीनियर विजयपाल सिंह का कहना था कि पुराना समय बहुत अच्छा था। व्यक्ति चुनाव के दौरान चाहे किसी को वोट कर दे, बिल्कुल भी झगड़ा नहीं होता था। अब तो चुनाव में रंजिश बढ़ गई है। यदि किसी प्रत्याशी को पता चल जाए कि उक्त व्यक्ति ने उसे वोट नहीं किया तो उसके साथ झगड़ा करने पर उतारू हो जाते है। बुजुर्ग श्याम सिंह का कहना था कि पहले चुनाव में न पैसे चलते थे और न ही शराब। अब चुनाव मेें पानी की तरह पैसा बहाया जाता है।
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