बागपत। मनरेगा योजना के सोशल ऑडिट में टीम को बिजरौल, अलावपुर और खट्टा प्रहलादपुर में खामियां मिलीं। कहीं मजदूरों को बिना काम के ही भुगतान किया तो कहीं एक परिवार एक से अधिक जॉब कार्ड बने मिले, जिन्हें सौ से अधिक दिन के लिए भुगतान किया। टीम ने बीडीओ और डीडीओ को अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराई।
जिले के गांवों में मनरेगा के तहत किए विकास कार्यों की जांच पड़ताल के लिए सोशल ऑडिट का काम चल रहा है। बड़ौत ब्लॉक के बिजरौल गांव में टीम ने जांच पड़ताल की। यहां पर रोजगार दिवस आयोजित नहीं मिला। जॉब कार्ड श्रमिकों के पास नहीं थे, भुगतान की रसीद, उपस्थिति में मापन का कार्य, गांवों में वॉल पेंटिंग, कार्यों के तीन चरणों के फोटो नहीं थे। एक परिवार को एक से अधिक जॉब कार्ड जारी किए। ग्राम सभा की अनुमति के बगैर कार्य लिया। इसी ब्लॉक के अलावपुर गांव में ऐसे श्रमिकों को भी भुगतान किया, जिसने काम नहीं किया। एक परिवार के एक से अधिक जॉब कार्ड बनाएं और 100 से अधिक दिन के लिए भुगतान किया। श्रमिकों के पास जॉब कार्ड, कार्य की फोटो और सोशल ऑडिट के लिए अभिलेख उपलब्ध नहीं गए हैं।
पिलाना ब्लॉक के खट्टा प्रहलादपुर गांव में कई कमियां मिलीं। श्रमिकों के पास जॉब कार्ड, भुगतान रसीद, पंचायत रजिस्टर को उपलब्ध नहीं दिए। एक से अधिक व्यक्ति की मजदूरी का एक ही एकाउंट में जमा किया। परिवार को एक से अधिक जॉब कार्ड जारी किया। मजदूरों की शिकायत रही न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं कराया। सोशल ऑडिट टीम ने बीडीओ और डीडीओ को अपनी रिपोर्ट भेज दी।