बिनौली (बागपत) सीमित संसाधनों और तंग जगह में संचालित वीर शाहमल राइफल क्लब बिनौली के निशानेबाज शिखर छूने लगे हैं। सौरभ चौधरी ने पहले एशियाई खेलों और फिर वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतकर ओलंपिक कोटे की दावेदारी ठोक दी है। यूथ ओलंपिक की तैयारी में जुटे सौरभ को उम्मीद है कि उसे पदक जरूर मिलेगा।
किराए के भवन में एक छोटे से कमरे में संचालित है वीर शाहमल राइफल क्लब। इसी क्लब के निशानेबाज सौरभ चौधरी ने दुनिया के निशानेबाजों को हैरान कर पदक जीते हैं। ओलंपिक पदक विजेताओं को हराकर एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतना बड़ी कामयाबी रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौरभ को पहचान मिली। कोच अमित श्योराण कहते हैं कि सीमित संसाधनों में अभ्यास कर ही सौरभ के खेल ने सबको आकृष्ट किया है। पिछले सात साल से संचालित शूटिंग रेंज के कोच स्तरीय सुविधाएं जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी सहयोग के बिना चल रही रेंज पर अभ्यास के लिए रजिस्ट्रेशन की कमी नहीं है, लेकिन जगह नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को मना करना पड़ता है। श्योराण कहते हैं कि उन्हें जमीन की जरूरत है ताकि वह खिलाड़ियों को निखार सकें।
बिनौली में छिपा है प्रतिभा का खजाना
बिनौली। वीर शाहमल राइफल क्लब के निशानेबाजों ने बेहद कम समय में ही नाम कमाना शुरू कर दिया है। सौरभ चौधरी के अलावा पैरा खेलों में निशानेबाज दीपेंद्र का चयन हुआ है। इससे पहले हिसावदा के प्रशांत मलिक ने साल 2014 के नेशनल खेलों में तीन गोल्ड जीतकर तहलका मचा दिया था। हिसावदा के ही मोनू कुमार का चयन कुवैत में होने जा रही एशियन एयरगन की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के लिए हुआ है।
पदक हम देंगे, चाहिए जमीन का सहयोग
बिनौली। कोच अमित श्योराण कहते हैं कि उन्हें सिर्फ जमीन का सहयोग चाहिए, पदक उनके खिलाड़ी खुद देंगे। रेंज पर एक से बढ़कर एक खिलाड़ी है, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बागपत का नाम रोशन करेंगे। संसाधनों को बढ़ाने के लिए भी वह प्रयास कर रहे हैं।
40 खिलाड़ी बहा रहे पसीना
बिनौली। कोच बताते हैं कि जगह का अभाव है। सिर्फ 40 खिलाड़ियों का ही रजिस्ट्रेशन किया है। अन्य खिलाड़ियों को वापस भेजना पड़ा।
------------------