बड़ौत (बागपत) ।
असारा गांव में अल्पसंख्यक अधिकार परिषद के कार्यालय में हुई बैठक में जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के तीन तलाक पर दिए बयान का समर्थन किया।
इसमें परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूसुफ चौधरी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को अपने मौलिक अधिकारों के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। यह मुसलमानों की शरीयत का मसला है। ऐसे में तीन तलाक पर किसी भी कानून को बनाने से पहले शरीयत के जानकार धर्म गुरुओं से मशवरा होना जरूरी है। जबकि ऐेसा नहीं किया है। ये कानून मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित करता है। जो कबूल नहीं है। इसका अल्पसंख्यक अधिकार परिषद पुरजोर विरोध करेगी। प्रदेश सचिव कारी मोहम्मद तारीक फलाही ने कहा कि तलाक-ए-बिद्दत शरीयत में भी पसंद नहीं है। मुसलमान तलाक, निकाह व ऐसे कोई भी पारिवारिक मसले का शरीयत से बाहर निर्णय न लें। जिससे सरकार को हस्तक्षेप करने का मौका मिले। कुछ राजनीतिक पार्टियां तीन तलाक के मसलों को लेकर राजनीति खेल रही है। उनको बाज आना चाहिए। इसकी अध्यक्षता मोहम्मद उमर ने की।