- बागपत, पिलाना व बिनौली ब्लॉक के ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों को बिना काम दे रहे वेतन
- करीब 20 ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों से दो कलस्टर में काम कराया जा रहा, फिर भी छह को बैठाकर दे रहे वेतन
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। अफसरों की मनमानी के कारण सरकार के करीब 20 लाख रुपये बर्बाद हो रहे हैं। क्योंकि जिले के कई ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों को बिना काम के वेतन दिया जा रहा है। बागपत, पिलाना व बिनौली ब्लॉक के कई ग्राम पंचायत और विकास अधिकारियों को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी हुई है, जबकि 20 ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों से दो-दो कलस्टर में काम कराया जा रहा है। इस तरह अधिकारियों की मनमानी सरकार को हर महीने करीब ढाई लाख रुपये का चूना लगा रही है।
बागपत ब्लॉक में ग्राम पंचायत अधिकारी कृष्णकुमार तोमर व ग्राम विकास अधिकारी संदीप कुमार, पिलाना ब्लॉक में ग्राम पंचायत अधिकारी प्रेम कुमार व ग्राम विकास अधिकारी सतीश कुमार और बिनौली ब्लॉक में ग्राम पंचायत अधिकारी प्रशांत अहलावत, ग्राम पंचायत अधिकारी सचिन कुमार के पास किसी गांव की जिम्मेदारी नहीं है। इनमें संदीप कुमार को केवल शिकायत आदि की जिम्मेदारी सौंपी हुई है, जबकि इनमें किसी को नियमों के अनुसार मूल कार्य के साथ ही अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप सकते है।
आचार संहिता के बाद देना था कलस्टर, अभी तक नहीं दिया
इन ग्राम पंचायत और विकास अधिकारियों को करीब नौ महीने से खाली बैठाकर वेतन दिया जा रहा है। इनका 40 से 50 हजार रुपये तक वेतन है। इस तरह अभी तक करीब 20 लाख रुपये सरकार के बर्बाद किए जा चुके हैं। 20 ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों को दो कलस्टर दिए हुए है, जिनमें एक कलस्टर में तीन से पांच गांव रहते हैं। इस कारण वह सभी गांवों में रोस्टर के अनुसार नहीं पहुंचते है और गांवों में विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
एक पंचायत अधिकारी पर आठ गांव, 25 दिन से छुट्टी
निबाली कलस्टर में पांच ग्राम पंचायत है, जिनमें निबाली, नंगला जाफराबाद, महेशपुर चौपड़ा, कर्मअलीपुर गढ़ी है। गाधी कलस्टर में तीन गांव गाधी, बिचपड़ी, ब्राह्मणपुट्ठी है। यह दोनों कलस्टर ग्राम पंचायत अधिकारी रवि कुमार के पास है। वह पिछले 25 दिन से मेडिकल अवकाश पर चल रहे हैं। इसके बावजूद उनकी जगह किसी अन्य को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे है।
सरकार के 20 लाख रुपये बर्बाद हो गए: प्रमोद शर्मा
ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों को बैठाकर वेतन दिया जा रहा है। उन पर अभी तक लगभग 20 लाख रुपये बर्बाद कर दिए गए हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने कोई गड़बड़ की हुई है। यह इसलिए है कि उनसे काम नहीं कराया जा रहा है। बल्कि बिना किसी कारण के आराम से बैठाकर वेतन दिया जा रहा है। इस कारण गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
डीपीआरओ का कई महीने से यही जवाब, जल्द देंगे काम
डीपीआरओ अमित त्यागी का पिछले कई महीने से एक ही जवाब रहता है कि ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों को जल्द काम दिया जाएगा। इस बार भी उनका कहना है कि कलस्टर तलाश किया जा रहा है और इनको जल्द ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके बाद भी डीपीआरओ को कलस्टर नहीं मिल रहे हैं।