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संस्कार और मूल्यों के बिना मानव जीवन सार्थक नही

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बिनौली (बागपत)। श्री महानंद संस्कृत महाविद्यालय गुरुकुल लाक्षा ग्रह बरनावा में आठ दिवसीय 60वें विश्व कल्याण चतुर्वेद परायण महायज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को वैदिक विद्वान आचार्य धन कुमार शास्त्री ने कहा कि संस्कार और मूल्यों के बिना मानव जीवन सार्थक नहीं है।
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राष्ट्रीय वाचस्पति परोपकारिणी परिषद के अध्यक्ष आचार्य धन कुमार शास्त्री ने कहा कि खान पान, रहन सहन और व्यवहार का गर्भस्थ शिशु पर सीधा असर पड़ता है। गर्भिणि महिला के चारों ओर चित्र, प्रतिमा तथा पहनावा भी शिशु को स्वाभाविक रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कार विज्ञान सम्मत हैं। हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए, जिससे वे समाज सृजन और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक कार्य कर सकें। प्रधानाचार्य आचार्य विनोद कुमार शास्त्री, आचार्य गुरु वचन शास्त्री, अरविंद शास्त्री, सोमदत्त भारद्वाज आदि ने भी वेदोपदेश दिया। प्रसिद्ध भजनोपदेशक घनश्याम प्रेमी, वीर सिंह गांवड़ी, अंकुर भारद्वाज ने समाज सुधार, देशभक्ति व ईशभक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए।
यज्ञ में बीएसएनएल के पूर्व जीएम चंद्रहास, महेंद्र सिंह आर्य, देवेंद्र शास्त्री, जयवीर दत्त शास्त्री, कृष्णपाल, संजीव मुलसम, अजय त्यागी, प्रमोद नारंगपुर, सचिन त्यागी, राजीव धामा, सुधीर त्यागी, जेपी त्यागी, सतीश भारद्वाज, धनपाल बैंसला आदि रहे।
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