बागपत। चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होते ही कोल्हू उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कोल्हू पर गन्ने और मंडी में गुड़ की आवक 15 दिन में ही तीस फीसदी तक घट गई है। किसानों ने चीनी मिलों का रुख किया है। कोल्हू पर कम भाव मिलना इसकी बड़ी वजह है।
बागपत की तीनों चीनी मिलों ने 31 अक्तूबर को पेराई शुरू की, लेकिन कोल्हू पर गन्ने की आपूर्ति सितंबर से ही शुरू हो गई । करीब डेढ़ माह तक कोल्हू पर गन्ने की आपूर्ति खूब रही और मंडी में गुड़ की बेहतर आवक रही, लेकिन जैसे ही चीनी मिलों ने पेराई सत्र शुरू किया कोल्हू उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गन्ने की आवक 50 फीसदी ही रह गई है। बड़का गांव के कोल्हू संचालक ओमप्रकाश, भोपाल, ओमी और वेदू का कहना है कि चीनी मिल चलने से गन्ने की आपूर्ति कोल्हू पर घट गई है। जिस वजह से उन्हें भी अब नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडी में 30 फीसदी गुड़ हुआ कम
बागपत। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं गुड़ व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रमोद पालीवाल ने बताया कि 15 दिन आवक कम हुई है। इसकी वजह चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होना है। किसान अब कोल्हू के बजाए अधिक गन्ने की सप्लाई चीनी मिलों पर भी कर रहा है।
भाव का अंतर भी बड़ी वजह
बागपत। कोल्हू पर किसानों को सिर्फ 200 रुपये प्रति कुंतल का भाव ही मिल रहा है, जबकि चीनी मिल पर अधिक भाव है। ऐसे में किसान पेराई सत्र शुरू होते ही कोल्हू से हट रहे हैं।
खांडसारी इकाइयों का भी यही हाल
बागपत। खांडसारी इकाइयों पर भी गन्ने की आवक कम हुई है। जिले में कई खांडसारी इकाइयां संचालित हैं, इनमें गुड़ के बजाए खांड़ बनाने का कार्य किया जाता है।