बागपत। जिला अस्पताल में डेंगू का मरीज आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में मरीज को मेरठ मेडिकल के लिए रेफर किया गया है। इसके अलावा अस्पताल में डेंगू संभावित बुखार के मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने तमाम सीएचसी अधीक्षकों को गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच करने के निर्देश दे दिए हैं।
जिले में मौसम बदलते ही डेंगू बुखार ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। जिला अस्पताल में दिन प्रतिदिन डेंगू संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। बृहस्पतिवार को खेकड़ा निवासी 22 वर्षीय युवक विकास को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने जांच की तो डेंगू से ग्रसित मिला। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सक ने उसे मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष डेंगू का पहला मरीज मिला है। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए मेरठ के लिए रेफर कर दिया। डेंगू बुखार के मरीज को तरल पदार्थ का ज्यादा सेवन करना चाहिए। गांव में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज न कराकर अच्छे चिकित्सक से इलाज कराए।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में डेंगू संभावित रोग के मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। रोजाना अस्पताल में एक से दो मरीज डेंगू संभावित रोग से पीड़ित आ रहा है। मरीजों की प्लेटलेट्स घट रही है। उन्होंने मरीजों व उनके तीमारदारों से मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी। मकान की छत या कूलरों में पानी भरकर न छोड़ें। डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही पनपता है। उन्होंने यह भी बताया कि डेंगू के मरीज को समय से रेफर करने की जिम्मेदारी चिकित्सक की होती है। चिकित्सक जल्दी से मरीज को रेफर नहीं करते। जिस कारण उनकी जान को खतरा बढ़ जाता है। पिछले वर्ष रेफर न करने पर एक डेंगू मरीज की मौत हो गई थी। यदि समय से मरीज को रेफर कर दिया जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि विभाग के पास बीमारी के लड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री है तथा बीमारी को जड़ से खत्म करने की कवायद शुरू कर दी गई है। जिले के तमाम सीएचसी अधीक्षकों को गांव-गांव में शिविर लगाकर बुखार से पीड़ित लोगों को जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने मरीजों एवं तीमारदारों से भी सावधानी बरतने की सलाह दी।
--------------------
ये है डेंगू के लक्षण
. हाथ पैरों पर चकत्ते पड़ना
. समय-समय पर उल्टी होना
. पेट व सिर में दर्द रहना
. हड्डियों में दर्द रहना
---------------------
इस तरह करें बचाव
. मच्छरदानी का प्रयोग करना
. शुद्ध आहार का सेवन करना
. बकरी का दूध व कीवी फल खाना
. कूलर व छत पर पानी जमा न होने देने