बिनौली (बागपत)। बरनावा में हिंडन किनारे उत्खनन के लिए पुरातत्व विभाग की टीम ने ट्रैंच का खाका खींचना शुरू कर दिया है। जिस जगह खुदाई होगी, उसकी सफाई कराई जा रही। ट्रैंच तैयार होने के बाद टीम निरीक्षण करेगी, अगर जरूरी हुआ तो इसमें संशोधन के बाद उत्खनन होगा। मजदूर दिनभर सफाई व्यवस्था में लगे रहे।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम उत्खनन करेगी। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल को यहां उत्खनन के लिए लाइसेंस दिया। बुधवार को विभाग की सर्वेयर टीम ने ट्रैंच यानि जिस भूभाग की खुदाई होनी है, उसका खाका खींचना शुरू कर दिया है। खूंटे गाड़े और एक निश्चित भू-भाग की सफाई का कार्य मजदूरों ने शुरू कर दिया है। खुदाई स्थल तैयार हो जाने के बाद डॉ. एसके मंजुल के नेतृत्व में टीम दौरा करेगी। जरूरत पड़ी तो जगह में बदलाव भी किया जा सकता है। सर्वेयर टीम का कहना है कि दस जनवरी तक उत्खनन के लिए यहां पर ट्रैंच तैयार हो जाएगा। बुधवार को दिनभर यहां पर मजदूर सफाई करते नजर आए।
उत्खनन से ही खुलेगा राज
बिनौली (बागपत)। सहायक पुरातत्व विद बीएस फोनिया, वीके राय, मोहन सिंह, आरके नौटियाल और सुनील कुमार ने बताया कि ट्रैंच के लिए सफाई कराई जा रही है। जमीन के नीचे क्या राज दफन है और यह क्षेत्र किस सभ्यता से जुड़ा हुआ है यह तो उत्खनन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
दिनभर लोगों का रहा जमावड़ा
बिनौली (बागपत)। उत्खनन के लिए टीमें पहुंचते ही यहां पर आसपास के गांव से ग्रामीण पहुंचने शुरू हो गए। दिनभर लोगों का जमावड़ा रहा। सफाई व्यवस्था देखी गई। लोगों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता बनीं हुई है कि आखिर बरनावा में किस काल की सभ्यता से पर्दा उठेगा। चंदायन और सिनौली के उत्खनन का जिक्र भी रहा।