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काठा में फिर मौत को दावत देने की मजबूरी

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बागपत। काठा गांव के सीने में अभी नाव हादसे में 19 मौत का दर्द अभी कम नहीं हुआ। अपनों को खो देने वालों के आंसू नहीं सूखे। प्रशासन के तमाम दावे हवाई साबित दिख रहे हैं। यमुना के रास्ते पर चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है, लेकिन किसानों को यह नहीं बताया कि वह यमुना पार के अपने खेतों तक आखिर कैसे पहुंचे। अब नदी पार करने के लिए यहां पर नाव नहीं चलती। काठा गांव का यमुना के पार सैकड़ों बीघा का रकबा है। सवाल है कि आखिर खेतों तक किसान कैसे पहुंचे। प्रशासन ने आंखें बंद कर ली है, यही वजह है कि किसान और मजदूर मौत को फिर से दावत देते हुए यमुना का सीना चीरकर अपने खेतों तक पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी कई ऐसे ही नजारे देखने को मिलें। किसान अपनी बुग्गी से नदी पार करते देखे गए। दूसरा रास्ता ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माणाधीन पुल का अपनाया जा रहा है। ग्रामीण कहते हैं कि प्रशासन ने सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगा दिया है, लेकिन यह बताना चाहिए कि आखिर वह नदी पार कैसे करें।


मुआवजे लिए जाएंगे अदालत
हादसे में मारे गए परिवारों को अलग-अलग मुआवजा दिए जाने का आरोप है। मुख्यमंत्री राहत कोष और अन्य योजना के तहत चार-चार लाख रुपये दिए गए थे। इनके अलावा तीन परिवार को किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा मिला था। 14 परिवारों का कहना है कि उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। मृतक मुनेश के बेटे दीपक, मृतका सोहनवीरी के पति बालीराम, अनिल के पिता वीरेंद्र का कहना है कि मुआवजा वितरण में भेदभाव किया गया है। अपना हक पाने के लिए वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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यमुना पार न करें, इसके लिए लगवाए बोर्ड
ग्राम प्रधान गुड्डी देवी के पति सत्यवीर सिह का कहना है कि यमुना में गहरे गड्ढे और पानी होने के कारण कोई भी उसको पार न करें, इसके लिए मुख्य मार्ग पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए है। इसके अलावा प्रशासन अफसरों से यमुना के गड्डे बंद कराने की मांग की जा रही है।
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टीम भेजकर जांच कराई जाएगी : एसडीएम
खेकड़ा एसडीएम आशीष कुमार ने कहा यमुना में अवैध रूप से बालू खनन होने और यमुना को पार करने की उनको जानकारी नहीं है। टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

मरने वालों का ब्योरा

इलियास (55) पुत्र शेरदीन
रामपाल (52) पुत्र हरनारायण
नजीरन (55) पत्नी मंगते
मुनेश (42) पत्नी रमेश
रज्जो (42) पत्नी बरसे
जुबैदा (55) पत्नी अल्लाह बंदा
तेजपाल (45) पुत्र दरियाव सिंह
संतरा (53) पत्नी ओमवीर
अनिल (20) पुत्र बालेश्वर
मोनी (17) पुत्री श्रीभगवान
श्यामवीरी (32) पत्नी जोगेंद्र सिंह
रेखा (35) पत्नी सुमेंद्र सिंह
सविता (19) पुत्री रतन सिंह
रामबीरी (28) पत्नी जसवंत
सोहनवीरी (55) पत्नी बालीराम
काजल (16) पुत्री सोहनवीर
शमां (20) पुत्री मौसम
मोहसीना (20) पुत्री इलियास
सुनील (किसान का नौकर)

मौत के मुंह से बचे ग्रामीण

सुमन (45) पत्नी दीपक
खातून (48) पत्नी शमशाद
फूलमती (40) पत्नी रोशन लाल
मंजू (35) पत्नी बिंदर
कमला (45) पत्नी रामपाल
शिमला (40) पत्नी राजवीर
मीरा (35) पत्नी श्री भगवान
बबली (42) पत्नी वीरसैन
संजोगिता (40) पत्नी रामबीर
नीरज (25) पुत्र मनोज
ममता (40) पत्नी नरेंद्र


एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन
बागपत। अकेले काठा गांव की यमुना के पार एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन है। किसान और मजदूरों को रोजाना यमुना नदी पार करनी पड़ती है। प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नदी पार करने के लिए नहीं किया गया है। 14 सितंबर के हादसे से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा।
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