बड़ौत (बागपत)।
विधायक केपी मलिक ने किसानों का बकाया गन्ना भुगतान, अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना लेने तथा क्रय केंद्रों पर किसानों को जन सुविधा देने के संबंध में जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
विधायक ने पत्र में लिखा है कि बागपत के किसानों की मुख्य फसल गन्ना है और गन्ना किसानों का ही सर्वाधिक शोषण हो रहा है। सरकार की प्राथमिकता के अनुसार किसानों को अधिकाधिक सुविधा प्रदान करना है, परंतु गन्ना किसानों की समस्याओं का निदान नहीं हो रहा है। सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि चीनी मिलों को गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिन में सुनिश्चित रूप से किया जाए, लेकिन न तो 14 दिन में उनका भुगतान किया जा रहा है और उनका पिछला बकाया भुगतान भी नहीं किया। इससे जनपद का किसान भुखमरी की कगार पर है, क्योंकि किसानों के पास पैसा नहीं है तो वह अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूरा नहीं कर पा रहा है। पूर्व में कई किसान आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर चुके हैं। जनपद की शुगर मिलों द्वारा गन्ना प्रजाति 12, 23, 48 आदि को अस्वीकृत प्रजाति बताकर नहीं लिया जा रहा है तो जिन किसानों के पास इन प्रजातियों का गन्ना है वह क्या करें। मिलों द्वारा गन्ना न लेने के कारण किसानों के गन्ने का खेत खाली नहीं होगा तो वो अपनी गेहूं की फसल कैसे बुवाई करेगा, इसलिए इन प्रजातियों का गन्ना लेने के तत्काल शुरूआत की जाए। ताकि किसानों की गेहूं की फसल की बुवाई समय से हो सके। चीनी मिलों द्वारा स्थापित गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं नहीं दी जा रही है। तौल लिपिक की मिली भगत से एडवांस गन्ना लिया जा रहा है। इससे छोटे किसानों को असुविधा होती है और मिल के अधिकारियों द्वारा गन्ना पर्ची जारी करने में भ्रष्टाचार किया जा रहा है, इसलिए इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ताकि किसानों को न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों की मनमानी के कारण जनपद के गन्ना किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।