बागपत। नोट बंदी को एक साल बीत गया। नोट बंदी के एलान के साथ बाजार में छाई मंदी का असर अब तक दिख रहा है। व्यापारियों का कहना है कि नोट बंदी के बाद जीएसटी से परेशानी बढ़ी। बाजार की स्थित पूरी तरह ठीक नहीं है। नोट बंदी का संपत्ति के काम पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
नोट बंदी के बाद बैंकों के बाहर जिलेभर के लोग कतार में नजर आए। घर या दुकानों में रखे पुराने नोट बैंकों तक तो पहुंच गए, लेकिन पर्याप्त मात्रा में नोट अभी तक वापस मार्केट में नहीं आए हैं। इसका असर बाजार पर दिखता है। सबसे बड़ी वजह है कि नोट बंदी से उबरने के बाद जीएसटी लागू हो गया, इससे व्यापारियों की उलझने बढ़ गई। इस कारण बाजार के पटरी पर लौटने की रफ्तार उम्मीद से कहीं कम दिख रही है। व्यापारी जगदीश अरोरा कहते हैं कि बाजार नोट बंदी से पूरी तरह धड़ाम हो गया था, अब तक इसमें उबार नहीं आया। जीएसटी ने बाकी की कसर पूरी कर दी। दुकानदार सुरेंद्र चौहान कहते हैं कि नोट बंदी से शुरूआत में मुसीबत का सामना करना पड़ा, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं।
संपत्ति में ऐसी मंदी, नहीं बढ़े सर्किल रेट
नोट बंदी के बाद संपत्ति में आई मंदी के कारण बाजार अभी तक उबर नहीं सका है। यही वजह है कि इस बार जिले के सर्किल रेट तक नहीं बढ़ाए गए। बागपत, बड़ौत और खेकड़ा में बैनामों का टारगेट तक पूरा नहीं हो पा रहा है। एक साल बाद भी संपत्ति के काम में उछाल नहीं आ सका है।
कई लोगों की हुई थी मौत, कार्रवाई भी
नोट बंदी के दौरान जिले में कई लोगों की मौत हो गई थी। निवाड़ा में युवक की मौत के अलावा कोताना में बैंक में ही किसान की मौत हो गई थी। उधर, अमीनगर सराय की शाखा में पुलिसकर्मियों ने लोगों पर डंडे बरसाए तो इनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
अब तक मुसीबत है दो हजार का नोट
नोट बंदी के दौरान बाजार में लोगों को राहत देने के लिए नई करेंसी के तौर पर दो हजार रुपये का नोट उतारा गया, लेकिन इससे परेशानी ही बढ़ी है। आम आदमी दो हजार रुपये के नोट को लेकर परेशानी झेलता है, यही नहीं छोटे दुकानदारों को भी मुश्किलें होती है। बाजार मेें पर्याप्त संख्या में 50 या एक सौ रुपये के नोट अभी नजर नहीं आ रहे हैं।
व्यापारी संजय जैन का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी का यह कदम देश हित में सही रहा, क्योंकि इससे काला धन रखने वालों और भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगा है।
उद्यमी आकाश चौधरी कहते हैं कि नोट बंदी देश के हित के लिए तो सही है, लेकिन इससे व्यापारियों को काफी नुकसान पहुंचा है। व्यापार हित में नोट बंदी लाभदायक नहीं रही।
मेडिकल स्टोर संचालक अनुराग मोहन का कहना है कि नोट बंदी से व्यापार अब तक प्रभावित है। दवा का व्यापार हो या फिर अन्य कोई सभी बुरी तरह से प्रभावित हुए।
स्कूल संचालक हर्षित जैन का कहना था कि स्थिति अब सामान्य हो चुकी है। कालेधन और भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक अंकुश लगा है।
कपड़ा व्यापारी नवनीत जैन का कहना था कि नोट बंदी के दौरान कपड़ा व्यापार ठप सा हो गया था। कैश की कमी के चलते बाहर से माल नहीं ला पा रहे थे और लोगों के पास कैश न होने के चलते पुराना माल बिक नहीं रहा था।