बागपत। श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सरूरपुर कलां में सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक और शांति धारा की। भक्तामर महामंडल विधान में मांडले पर 48 अर्घ्य चढ़ाएं। इसके बाद पदम प्रभु भगवान की पूजा की अर्चना की।
भक्तामर महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा में नमन जैन ने कहा कि औषधि केवल रोग निवृत्ति के लिए होती है, स्वास्थ्य के लिए नहीं। स्वास्थ्य तो उपलब्ध है। शांति के लिए हमें कोई प्रयत्न नहीं करना, वह प्राप्त ही है। अशांति देने वाले, विषाद देने वाले कर्मों से हमें बचना है। जिस प्रकार रोड़ पर चलते समय हमें स्वयं गाड़ियों से बचना पड़ता है, लेकिन इस नियम को हम जीवन में और बहुत जगह पर लागू नहीं करते हैं। कलह की स्थितियों से विवेक पूर्वक बचते रहो। जिस प्रकार एक कुशल नाविक तेज धार में समझदारी से अपनी नाव को किनारे लगा देता है उसी प्रकार आप भी समझदारी पूर्वक जीवन रुपी नाव को शांति और आनंद के किनारे पर रोज पहुंचाओ। विधान सचिन जैन ने कराया। लक्ष्य, वैशाली, पूर्ति, मेघा, प्रज्ञा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, अनीता, सपना, जूली, उषा, सुव्रत, अदिति, हंस कुमार जैन आदि रहे।