बागपत। बाजार में रंग के त्योहार होली की तैयारियां दिखने लगी है। जिले के 20 से अधिक गांवों में तैयार किया जा रहा मिलावटी मावा लोगों की सेहत खराब कर सकता है। स्थानीय स्तर पर खपत के अलावा इस मावे को देश की राजधानी दिल्ली में भी सप्लाई किया जाता है। रोजाना भट्टियों पर मावा निकालकर दिल्ली सप्लाई किया जाता है, लेकिन जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहा है तो मावा की मांग बढ़ गई है। ऐसे में मिलावट खोरों ने भी चांदी काटनी शुरू कर दी है। दूध से पूर्ति नहीं होने के कारण पाउडर, आलू और केमिकल का प्रयोग कर मिलावट का खेल शुरू कर दिया। रोज सुबह बागपत के विभिन्न गांवों से डीसीएम में लेकर इस मावा को दिल्ली सप्लाई के लिए भेज देते हैं।
दूध की जरूरत नहीं, मावा तैयार
बागपत। भट्टियों पर मिलावट का खेल देखा जा सकता है। बगैर दूध ही मावा तैयार किया जा रहा है। मिल्क पाउडर को गरम पानी मिलाकर उबालते हैं। चिकनाई के लिए बाजार में मिलने वाला घी या फिर वनस्पति मिलाकर इसका मावा निकालते हैं। मावा में आलू और केमिकल मिलाने का खेल भी चल रहा है। आसपास के क्षेत्र के अलावा दिल्ली में बड़ी संख्या में मावा को सप्लाई किया जा रहा है।
यहां तैयार किया जा रह मावा
बागपत। जिले के धनौला सिल्वरनगर, ट्यौढ़ी, पलड़ा, मिलाना, दाहा, झूंडपुर, अमीनगर सराय, खपराना, दाहा, दोघट, टीकरी, चौबली, बरनावा, बिनौली, ओड्ढापुर, जागोस, बड़ौत और फौलादनगर समेत बीस से अधिक गांव में मावा निकाला जा रहा है। होली नजदीक आते ही भट्टियों की संख्या बढ़ गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि अधिकारी सुरेंद्र चौरसिया बताते हैं कि छापे मारी अभियान शुरू कर दिया गया है। छपरौली और असारा में मामले पकड़े गए हैं। जो लोग भट्टियां चला रहे हैं, उनके खिलाफ अभियान जारी रहेगा। ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है। दिल्ली सप्लाई किए जा रहे मावा के भी नमूने भरे जाएंगे।
सिल्वरनगर में मिल चुका जहरीला मावा
बागपत। धनौरा सिल्वरनगर में कई साल पहले सेलकड़ी का पाउडर मावा में मिलाने का खेल सामने आया था। यह प्रकरण अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके अलावा यहां कई बार छापे मारी में भी मिलावटी मावा मिल चुका है।
इन बीमारियों का खतरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागपत के मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास कुमार कहते हैं मिलावटी मावा से पेट की बीमारियों का खतरा रहता है। किडनी और लीवर के डैमेज होने का खतरा रहता है। आंखों की रोशनी कम होने का भी खतरा बनता है। बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है।