बागपत। उर्दू मंच के सबसे बड़े संचालक रहे अनवर जलालपुरी के निधन से साहित्य जगत में गम का माहौल है। मुशायरों और कवि सम्मेलनों में उनके साथ कई बार मंच साझा करने वाले बागपत के कवि डॉ. विनीत चौहान कहते हैं कि उर्दू मंच ने एक दिलदार शायर खो दिया। शायरों के बीच वह जितने अजीत थे, उतने ही कवियों के बीच भी। बेहद संजीदा और मददगार इंसान थे।
किरठल गांव के रहने वाले विनीत चौहान ने उनके निधन पर उन्हीं का शेर %%मैं जा रहा हूं मेरा इंतजार मत करना, मेरे लिए कभी भी दिल सोगवार मत करना, मेरी जुदाई तेरे दिल की आजमाइश है, इस आइने को कभी शर्मसार मत करना’ सुनाया। चौहान ने बताया कि लखनऊ के मुशायरे में उन्होंने बुलाया। वह बेहद मीठे इंसान थे। फिल्म डेढ़ इश्किया में उन्हें शेर पढ़ते देखकर बेहद खुशी हुई थी। यूपी सरकार ने उन्हें यश भारती से नवाजा। ऐसी शख्सियत रोज जन्म नहीं लेती हैं। विनीत बताते हैं कि उनका दूसरा शेर %मेरी बस्ती के लोगों! अब न रोको रास्ता मेरा, मैं सब कुछ छोड़कर जाता हूं देखो हौसला मेरा, मैं खुद गर्जी की ऐसी भीड़ में अब जी नहीं सकता, मेरे जाने के फौरन बाद पढ़ना फ़ातेहा मेरा’ भी लोगों ने सालों तक खूब पसंद किया था। उर्दू मंचों के वह बेहद शालीन और अच्छे संचालकों में पहले पायदान पर थे। उन जैसी तहजीब शायद ही अब देखने को मिले।
अकबर द ग्रेट के संवाद भी लिखे
बागपत। विनीत चौहान बताते हैं कि उन्होंने धारावाहिक अकबर द ग्रेट के संवाद भी लिखे थे। जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया।
उर्दू और हिंदी को बताते थे बहनें
बागपत। कवि मंचों पर उन्होंने उर्दू और हिंदी को हमेशा बहनें बताया। वह कहते हैं कि दोनों भाषाओं को कभी अलग नहीं किया जा सकता। वह दोनों भाषाओं को हमेशा आगे बढ़ाते रहे।