बड़ौत (बागपत)।
चिकित्सकों पर जीएसटी लागू नहीं किया, लेकिन चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही मेडिसिन पर टैक्स लगा है। दूसरी तरफ मेडिकल स्टोरों पर सॉफ्टवेयर डाउन लोड नहीं हुआ। दवा का बिल नहीं करने मेडिकल स्टोर संचालक और मरीज परेशान हैं। आगे जाकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
सरकार ने जीएसटी चिकित्सा से दूर रखा गया है। चिकित्सकों का मानना है कि इस टैक्स के लगने से उन्हें इतनी परेशानी नहीं है, जितनी उनके द्वारा लिखी जा रही मरीजों को दवा लेने में परेशानी हो रही है। इसीलिए मरीज बिल भी नहीं मांग रहे हैं। इस संबंध में नगर के चिकित्सक डॉ. आनंद तोमर ने बताया जीएसटी लगाने से पहले इसकी पूरी तरीके से यह सॉफ्टवेयर कैसे डाउन लोड होगा, इसकी जानकारी दवा विक्रेताओं को देनी चाहिए थी। डॉ. अनिल जैन ने कहा जीएसटी लागू होने से हमारे चिकित्सक पेशे पर कोई प्रभाव नहीं है, लेकिन हमारे द्वारा लिखी जा रही दवा को लेने में जहां दवाई विक्रेताओं और मरीजों को परेशानी हो रही है, क्योंकि यह पूरी तरीके से दवाई विक्रेताओं को डाउन लोड करने की जानकारी नहीं है। डॉ. मनीष तोमर ने बताया मरीज अभी बिल नहीं मांग रहे हैं और न ही मेडिकल स्टोरों से पक्का बिल निकल पा रहा है, लेकिन आने वाले समय में परेशानी होगी। यही बात डॉ. विकास वशिष्ठ ने कहीं।