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जिला जेल में भी ठंड की चपेट में आए बंदी

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बागपत। जिला कारागार में भी बंदी ठंड की चपेट में आ रहे हैं। जेल के अस्पताल में बंदियों की सुबह से शाम तक लाइन लगी रहती है। हर रोज 200-250 मरीजों का इलाज होता है। इनमें से अधिकांश मरीज ठंड से ही पीड़ित चल रहे हैं। कई मरीजों को तो उच्च चिकित्सा के लिए जिला अस्पताल रेफर भी किया जाता है। हालांकि अफसरों का दावा है कि जेल में किसी भी बंदी की ज्यादा हालत गंभीर नहीं है।
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बागपत मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर अब्दुलपुर गांव के जंगल में जिला कारागार है। जिला जेल का 16 जून 2016 को उद्घाटन हुआ । इसके बाद ही मेरठ जेल से यहां पर बंदियों को शिफ्ट किया। जेल में बंदियों की क्षमता 660 है। उसके सापेक्ष यहां पर 823 बंदी हैं। उनकी सुरक्षा व्यवस्था के हिसाब से स्टाफ बहुत कम है। क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण सुविधाओं का भी टोटा हो रहा है। वहां पर बंदी बीमारी की भी चपेट में आ रहे हैं। इनमें से कुछ बंदी ठंड से ग्रस्त हो रहे हैं। कारागार के अस्पताल में आए दिन 200-250 बंदियों का इलाज हो रहा है। इनमें से अधिकतर ठंड से ग्रस्त हैं। जो जुकाम, खांसी और अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। 10-12 मरीज हर रोज अस्पताल में भर्ती होते हैं। बुजुर्ग बंदियों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है। उधर डिप्टी जेलर सुरेश बहादुर सिंह का कहना है कि जेल में बंदी सर्दी से तो ग्रस्त हैं, लेकिन किसी की ज्यादा हालत खराब नहीं है। जो बीमार है उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

एक माह में 16 बंदी लाए गए जिला अस्पताल
बागपत। डिप्टी जेलर का कहना है कि पिछले एक माह में 16 बंदियों को जांच के लिए जिला अस्पताल लाया गया । उसकी हालत में सुधार है। कई मरीजों का दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भी इलाज चल रहा है।
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सर्दी से बचने को मिलते हैं प्रति बंदी तीन कंबल
बागपत। सर्दी से बचने के लिए जेल में प्रति बंदी को तीन कंबल मिलते हैं। अब घरेलू कपड़े भी बंदी इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए अधिकांश बंदियों ने अपने घर से ही अपने कपड़े मंगवा रखे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि कंबलों की कोई कमी नहीं है।

28 बंदी रक्षक के कंधों पर कारागार की सुरक्षा
बागपत। जिला कारागार ओवर लोड हो रही है। मानक से अधिक बंदी जेल में है। उनकी सुरक्षा राम भरोसे है। मात्र 28 बंदी रक्षकों के कंधों पर जेल की सुरक्षा का जिम्मा है।
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जेल में नहीं है कोई सफाई कर्मी
बागपत। जेल की साफ-सफाई के लिए तीन सफाई कर्मी के पद स्वीकृत है। जबकि यहां पर एक भी सफाई कर्मी नहीं है। बंदी ही खुद सफाई करते हैं।
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