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हड्डी, ह्दय और छाती के इलाज के लिए नहीं डॉक्टर

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बागपत। जिला अस्पताल वर्तमान समय में राम भरोसे चल रहा है। इसमें मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं है। चौदह लाख की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी जिस जिला अस्पताल पर है। इसमें हड्डी, ह्दय और छाती रोग के विशेषज्ञ तक नहीं है। यही वजह है कि मरीजों को यहां उपचार नहीं मिलता और उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में जन सुविधाओं का टोटा है। सरकार ने जिला अस्पताल का भवन बनवाने मेंकरोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन यहां पर चिकित्सकों की भारी कमी है। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, चेस्ट रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 15 सौ के लगभग मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। ओपीडी से लेकर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को भारी परेशानी होती हैं। अस्पताल से प्रति छह से सात मरीजों को सुविधा नहीं होने के कारण मेरठ या दिल्ली हायर सेंटर रेफर किया जाता है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

बर्न यूनिट एवं ट्रामा सेंटर नहीं हुए शुरू
बागपत। जिला अस्पताल में बर्न यूनिट एवं ट्रामा सेंटर के लिए भवन तो बना हुआ है, लेकिन इन्हें आज तक शुरू नहीं किया गया। स्टाफ भी तैनाती नहीं होने से भवन भी जर्जर होने लगे हैं। आग से झुलसे लोगों को दिल्ली के लिए रेफर करना पड़ता है।
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अस्पताल में हो चुकी है बड़ी घटनाएं
बागपत। जिला अस्पताल सुर्खियों में रहा है। कई बार बड़ी घटनाएं हो चुकी है। 15 अक्तूबर 2018 में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती छात्रा मरीज से वार्ड ब्वाय समेत दो युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। जिसको लेकर अस्पताल की काफी बदनामी भी हुई थी। आए दिन तीमारदारों ओर स्वास्थ्यकर्मियों के बीच झड़प होती है। मोर्चरी पर लाश बदले जाने का मामला भी सामने आ चुका है।

स्टाफ की कमी से होती है परेशानी
बागपत। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाह ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को रेफर करना पड़ता है। ज्यादातर दुर्घटना में घायल लोगों को रेफर किया जाता है। अस्पताल में हृदय, हड्डी, चेस्ट रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इस कारण अस्पताल के मरीजों को परेशानी होती है। खाली पदों को जल्द ही भरवाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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