बागपत। जिला अस्पताल में बिजली न आने के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गर्मी से मरीज बिलबिला गए। नवजात बच्चों को महिलाएं वार्ड से बाहर लेकर घूमती रही। कोई कपड़े से, तो कोई हाथ के पंखे से हवा करता नजर आया। यह सिलसिला करीब तीन घंटे तक चला। मरीज और तीमारदारों ने अव्यवस्था पर अस्पताल प्रशासन पर नाराजगी जताई।
बिजली कट से जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पटरी से उतर गई। रविवार को पारा 40 डिग्री पर रहा। अस्पताल में रविवार को करीब साढ़े 11 बजे दोपहर से करीब पौने तीन बजे तक बिजली गायब रही। इस दौरान उमस के कारण लोगों को मुश्किलें झेलनी पड़ी। ऐसे में जिला अस्पताल में करीब तीन घंटे तक बिजली गुल रही, लेकिन यहां जनरेटर नहीं चलाया गया।
पंखे न चलने से वार्ड में भर्ती मरीज और प्रसूता महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके साथ मौजूद तीमारदार भी मरीजों को हाथ के पंखा से हवा करते नजर आए। नवजात बच्चों को हवा में घूमाने को मजबूर होना पड़ रहा था। तीन घंटे की इसी अव्यवस्था ने जिला अस्पताल की व्यवस्था बेपटरी नजर आई।
सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाह का कहना है कि ऊर्जा निगम नेे शट डाउन की जानकारी नहीं दी। इससे मरीजों को जरूर परेशानी हुई है। उनकी जानकारी में मामला आते ही जनरेटर चलवा दिया गया था।
एनआरसी में बच्चों ने झेली परेशानी
बागपत। एनआरसी और महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू वार्ड में 14 भर्ती थे। बिजली जाने के कारण यहां पर बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। एसएनसीयू में भर्ती सात बच्चों को परेशानी हुई। उधर जिला अस्पताल एनआरसी वार्ड में भर्ती सात बच्चों के परिजनों ने भी अपनी परेशानी से अवगत कराया। कुपोषण से पीड़ित बच्चे बेहाल नजर आए।
क्या कहते हैं लोग
टीकरी निवासी महिपाल ने बताया कि र्ढाई तीन घंटे बिजली गुल रही। यहां अव्यवस्था फैली हुई है। कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है।
कासिमपुर खेड़ी निवासी चमनलाल शर्मा ने कहा कि पानी की परेशानी सबसे बड़ी है। अस्पताल परिसर में बाहर एक हैंडपंप लगा है जहां से पानी लाते है। लाइट न आने से परेशानी उठानी पड़ रही है।
एनआरसी वार्ड में बागपत निवासी पायल ने बताया कि लाइट न आने से परेशानी हुई है। सभी लोग बेहाल है। कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
जौनमाना निवासी हरकली ने बताया कि एक तो गर्मी और ऊपर से बिजली जाने से परेशानी हुई है। बच्चे भर्ती, जिसको लेकर चिंता में है। यहां तो लाइट हर समय रहनी चाहिए।