पांच किमी एरिया के हर घोड़े के रक्त का लिया जाएगा नमूना
बागपत। ग्लैंडर्स फारसी रोग की पुष्टि के बाद बागपत को कंट्रोल एरिया घोषित किया जा चुका है। पॉजिटिव पा जा चुके घोड़ों के पांच किमी एरिया के प्रत्येक घोड़े और दस किमी के एरिया में 50 फीसदी घोड़ों के रक्त के नमूने लिए जा रहे हैं। अभी तक 30 से अधिक घोड़ों के रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए हिसार भेजे जा चुके हैं।
पशु चिकित्सा विभाग ग्लैंडर्स फारसी से बचाव की तैयारियों में जुटा है। हाल ही में दो घोड़ों में इसकी पुष्टि होने के बाद उन्हें इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया। बाकी दो में अभी रोग के लक्षण मिले हैं, जिनके रक्त के नमूने लेकर दोबारा से जांच के लिए अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भिजवाया गया है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव मिलती है तो उन्हें भी इंजेक्शन लगाकर मौत दी जाएगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि ग्लैंडर्स फारसी रोग की अश्वों में पॉजीटिव रिपोर्ट मिलने के बाद से जिले को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया गया है। यहां पर आस-पास के जनपद और राज्यों से घोड़ों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि नौरोजपुर गुर्जर रोड स्थित ईंट भट्ठा ग्लैंडर्स फारसी रोग का केंद्र है। इसके पांच किमी के दायरे में सौ प्रतिशत घोड़ों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इसके अलावा 10 किमी दायरे में 50 प्रतिशत घोड़ों के रक्त के नमूने एकत्र कर अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि रक्त लेने वाली पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा निरंतर लोगों को रोग से होने वाली परेशानियों से बताया जा रहा है। इससे दूरी बनाने का आह्वान किया गया है।
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खतरनाक है ग्लैंडर्स फारसी, अश्वपालकों को भी खतरा
बागपत। सीवीओ डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि ग्लैंडर्स फारसी रोग बेहद खतरनाक है। घोड़ों के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। इसके लिए अश्व पालकों को जागरूक किया जा रहा है।
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5000 से अधिक अश्व के लिए जाएंगे नमूने
बागपत। जिले में अश्व प्रजाति के लिए 5000 हजार से अधिक पशु है। इनमें अधिकांश ईंट भट्ठों पर है। जिसके माध्यम से मजदूर अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। इसके अलावा ऐसे भी लोग घोड़ों का पालन करते हैं जो घोड़ा बुग्गी के माध्यम से गांव-गांव जाकर सामान बेचते हैं। इन सभी के रक्त के नमूने लिए जाएंगे।
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जिले से बाहर नहीं जाएंगे घोड़ा मालिक
बागपत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि 30 घोड़ों के रक्त के नमूने लिए गए हैं। सभी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अश्व को लेकर जिले को छोड़कर अश्व पालक नहीं जाएगा। अगर ऐसा किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर निगेटिव रिपोर्ट आती है तो तभी वह जिले से बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी। सभी पशु पालकों को इसके लिए सख्त हिदायत दी गई है।