अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। गायत्री तपोवन हरिद्वार के तत्वावधान में मीतली में चल रही श्रीमद् भागवत कथा एवं गायत्री महायज्ञ चौथे दिन गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाई।
कथा वाचक आचार्य जगन्नाथ उपाध्याय ने कहा कि गजेंद्र मद में फूलकर परिवार, मित्र के साथ सरोवर के जल को दूषित कर रहा था। उसी जल में मगर रहता था। काल रूपी मगर ने गजेंद्र को पकड़ा। आज हम भी गजेंद्र के भांति अपने मद में फूलकर गंगा, यमुना, नर्मदा, गोमती, गोदावरी, सरयू, ब्रह्मपुत्र नदियों के जल को प्रदूषित कर रहे है। गंगा लगातर जितने भी जल श्रोत है उन श्रोतों का 70 प्रतिशत जल दूषित है। गंगा जल पीने के लायक नहीं बचा। पूजा पाठ का कचरा गंगाजल में प्रवाहित करने से जल प्रदूषित है। गंगा का जल स्तर भी दो फीट घट गया है। इसी तरह चलता रहा तो एक दिन गंगा विलुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्न के बिन कुछ दिन जीवित रह सकते है, लेकिन जल के बिना जीवन कल्पना भी नहीं कर सकते। आने वाली पीढ़ी जल के लिए तरसेगी। हम सब कथा के माध्यम से आज संकल्प ले हम जल को प्रदूषित नहीं करेंगे। लोगों को जल के प्रति जागरूक करेंगे। कथा में रामचरित्र, कृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन किया गया। संगीत टोली में हरिद्वार से आए धनंजय, बलराम, बृजेश, धीरेंद्र तिवारी ने संगीत के द्वारा कथा सुनाई। इसमें राजबल सिंह, सवरजीत सिंह, डॉ. कृष्णपाल, योगेश, योगेंद्र, दीपांशु, आदेश, आचार्य, तिलकराम, उमा सिंह, अभय सिंह, कृष्ण कुमार, दीपांजलि, पुष्पा, मास्टर नरेंद्र सिंह, शारदा का सहयोग रहा।