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कौन समझें पीड़ा, किसके पीछे चलें किसानों का कारवां

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बागपत। सियासत का दौर बदल गया है, लेकिन किसानों के जेहन में अब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की अमिट यादें हैं। कभी न खत्म होने वाली बातें। किसानों के हितों के लिए चौधरी चरण सिंह ने छपरौली से लखनऊ और फिर दिल्ली तक संघर्ष किया। किसानों की दी गई ताकत के दम पर ही वह देश के प्रधानमंत्री बने। पश्चिम उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में उनके बाद सूनापन है। किसानों के सामने आज भी समस्याएं हैं, लेकिन नए दौर की राजनीति में आखिर किसानों का कारवां किसके पीछे चले।
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चौधरी चरण सिंह पचास साल तक यूपी और देश की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे। बड़े घराने और ऊंचे लोगों की राजनीति करने वालों से उनका कड़ा राजनीतिक विरोध भी रहा। किसानों का कहना है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में उनके बाद उन जैसा किसान नेता नहीं हुआ। उन्होंने कई बिरादरी में बंटे किसानों को किसान बिरादरी बनाने का काम किया। खेती करने वालों को बताया कि उनकी बिरादरी किसान है। किसान उन पर आंखें बंद कर भरोसा करते थे और चौधरी चरण सिंह ने भी इस भरोसे को कभी नहीं टूटने दिया।

इमरजेंसी के बाद पहुंचे थे छपरौली
बागपत। छपरौली के पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह बताते हैं कि किसानों का उनसे गहरा लगाव था। छपरौली के लोग उनकी बातों पर गहरा विश्वास करते थे। पांच जनवरी 1977 को छपरौली में जलसे का एलान किया । इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से दो लाख किसान पहुंचे। दुखी किसान के हालात पर भाषण के बीच में ही बड़े चौधरी रोने लगे। लाखों की भीड़ में सन्नाटा छा गया। किसान भी रोने लगे। वह गरीब के सच्चे सेवक थे। ऐसा कोई किसान नेता देश में दूसरा पैदा नहीं हुआ।
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ईमानदारी की सीख देते थे बड़े चौधरी
बागपत। रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह गठीना बताते हैं कि 1979-80 में उनसे मिलने दिल्ली गया, यही उनसे पहली मुलाकात थी। तब चौधरी चरण सिंह ने जीवन में ईमानदारी का पालन करने, किसान और गरीब की सच्ची सेवा की सीख दी। यही सीख वह हर कार्यकर्ता को देते थे।

गांव के लिए जब दिया 48 प्रतिशत बजट
बागपत। छपरौली के पूर्व विधायक चौधरी नरेंद्र सिंह बताते हैं कि वित्त मंत्री रहते हुए चौधरी चरण सिंह ने गांव के लिए 48 प्रतिशत बजट दिया। गांव, गरीब और किसान के लिए ऐसा बजट अभी तक किसी सरकार ने पेश नहीं किया। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने नवंबर 1968 में मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए काले धन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए किसानों को मजबूत करना होगा। गरीबों का स्तर उठाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि लोगों के पास जमा धन बाहर लाया जाना चाहिए।

कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन और चौधरी चरण सिंह
बागपत। चौधरी चरण सिंह के कई उल्लेखनीय भाषण अब तक लोग गिनाते हैं। 1959 में कांग्रेस का नागपुर में अधिवेशन हुआ। सभी वक्ताओं को 15 मिनट में अपनी बात रखनी, लेकिन जब चौधरी चरण सिंह ने बोलना शुरू किया तो सबने उन्हें सुना। एक घंटा 57 मिनट तक वह भाषण देते रहे। यहीं से वह किसान राजनीति के केंद्र बिंदु बने और उन्हें देश में स्वीकारता मिली।
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