बागपत। जिले में पुलिस बल का टोटा है। जरूरत के हिसाब से सिपाहियों की संख्या कम है। ऐसे में महिला सिपाहियों को अब कई महत्वपूर्ण स्थानों पर ड्यूटी दी जा रही है। बैंकों के अलावा महिला बंदियों को कोर्ट में लाने ले जाने में महिला सिपाही ड्यूटी कर रही हैं। थानों के सर्किलों में भी फेरबदल किया गया है।
बागपत की सीमा हरियाणा के सोनीपत के अलावा यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद की सीमा से मिलती है। चौकसी के लिए अधिक पुलिस बल की जरूरत है, लेकिन उपलब्ध पुलिस बल कम है। एसपी जयप्रकाश के अलावा एक एएसपी, बागपत, खेकड़ा, बड़ौत और रमाला सर्किल के सीओ, 14 इंस्पेक्टर, 140 दरोगा, 950 सिपाही के पद सृजित हैं, लेकिन इनके सापेक्ष 98 दरोगा, 766 पुरुष सिपाही हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण ड्यूटी की जिम्मेदारी अब जिले में तैनात 144 महिला सिपाहियों के कंधों पर भी आन पड़ी है। पहले हल्की ड्यूटी कर रही महिला सिपाहियों को अब बैंक में सुरक्षा, बंदियों को लाने ले जाने में लगाई जा रही है। एसपी जयप्रकाश स्वीकार करते हैं कि पुलिस की कमी है। ऐसे में महिला सिपाहियों से बैंकों और अन्य स्थानों पर महत्वपूर्ण ड्यूटी भी कराई जा रही है।
थानों के सर्किल में इस तरह किया फेरबदल
बागपत। जिले में सीओ के क्षेत्राधिकार में भी परिवर्तन किया। एसपी जयप्रकाश ने बताया कि बिनौली थाने को बागपत सर्किल से हटाकर बड़ौत में कर दिया है। इसी तरह दोघट थाने को बड़ौत सर्किल से हटाकर रमाला सर्किल में कर दिया है। सीओ बागपत दिलीप सिंह के क्षेत्र में अब बागपत कोतवाली, सिंघावली अहीर और महिला थाना भी होगा।
काम के मारे, दरोगा हो गए बेचारे
बागपत। सिपाहियों की कमी के अलावा दरोगा की संख्या में भी बड़ी कमी है, इससे मुश्किलें खड़ी हो गई है। नियमित कार्य के अलावा दरोगाओं को गश्त, वीआईपी ड्यूटी समेत अन्य कामों में लगा दिया जाता है। ऐसे में दरोगा को विवेचना का समय नहीं मिल पाता है। जिले में पदों के सापेक्ष 42 दरोगा की कमी है।
काम का बोझ इतना, छुट्टी नहीं मिलती
बागपत। जिले में तैनात पुलिस कर्मी काम के बोझ से परेशान है। जिस कारण उन्हे कई-कई महीनों तक छुट्टियां तक नहीं मिल पाती है। सिपाहियों को 16 से 18 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है।