बिनौली (बागपत)। राष्ट्र संत आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा कि मोक्ष मुक्ति मिलने पर ही जीवन का कल्याण है। जैन संत ने कहा धर्म तो जीवन जीने की कला है।
बृहस्पतिवार को श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर परिसर में हुई धर्मसभा में श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है। विदेशों में हमारी संस्कृति को अपनाया जा रहा है जबकि हम अपनी संस्कृति से विमुख हो रहे हैं। पश्चिम सभ्यता के प्रभाव से युवा पीढ़ी दिशाहीन होकर तमाम व्यसनों से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि धर्म का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। तन और मन की स्वच्छता से धर्म का गहरा संबंध है। मंदिरों में जाकर बैठकर प्रार्थना करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और गम, चिंता, दुख परेशानी दूर हो जाती है। धार्मिक स्थल मस्तिष्क के इलाज के लिए हॉस्पिटल का काम करते हैं। धर्म मार्ग पर चलकर परमात्मा की भक्ति करने वाले मनुष्य को मोक्ष मुक्ति मिलती है और उसके जीवन का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि शाकाहार ही सर्वोत्तम आहार है। अंडा, मांस, मदिरा, फास्ट फूड आदि का सेवन करने वाले अपनी सेहत बिगाड़ रहे हैं। टीवी व इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल भी हमारी सेहत को प्रदूषित कर रहा है। धर्मसभा का संचालन ब्रह्मचारी अतुल भैया ने किया। इस दौरान मुकेश जैन बजाज, महेश चंद जैन, रविंद्र जैन, सत्यप्रकाश गोयल, श्रवण जैन, राकेश जैन, सुधांशु जैन, पीयूष जैन, पारस जैन, मदन सेन जैन, विजय जैन, योगेश जैन, सचिन जैन आदि मौजूद रहे।