किसानों ने गन्ना मूल्य वृृद्धि को नाकाफी बताया
बागपत। सूबे की योगी सरकार ने नए पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित कर दिया है। गन्ना मूल्य में दस रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। विपक्षी दलों और किसानों का कहना है कि सरकार ने सिर्फ नाम के लिए ही गन्ना मूल्य बढ़ाया है। यह बढ़ोत्तरी नाकाफी है, इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। सरकार को कम से कम गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति कुंतल करना चाहिए था।
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि सरकारी बड़ी बातें करती हैं, लेकिन गन्ना मूल्य की बढ़ोत्तरी सिर्फ दस रुपये की हुई है। इससे किसानों का भला कैसे हो सकेगा। पिछले सत्र के करोड़ों रुपये बकाया है, लेकिन अब तक सरकार किसानों का बकाया भुगतान नहीं करा सकी है।
बसपा जिलाध्यक्ष विक्रम भाटी का कहना है कि बसपा सरकार ने गन्ने के सबसे ज्यादा दाम बढ़ाए थे, इसके बाद कोई भी सरकार किसान के हित में अधिक दाम नहीं बढ़ा पाई। बसपा के पास ही किसान हितैषी नीतियां है। भाजपा सरकार सिर्फ बातें करना ही जानती हैं।
कांग्रेस नेता अनिल देव त्यागी का कहना है कि गन्ना मूल्य नाकाफी है। सरकार को कम से कम 50 रुपये की बढ़ोत्तरी करनी चाहिए थी। सरकार का रवैया किसान विरोधी है। इसे कतई सहन नहीं किया जाएगा। इस मूल्य वृद्धि से किसानों का कोई भला होने वाला नहीं है।
रालोद के राष्ट्रीय सचिव सुखबीर सिंह गठीना का कहना है कि गन्ना मूल्य वृद्धि सिर्फ नाम के लिए की गई है। सरकार के किसान हितैषी होने की पोल भी खुल गई। गन्ना मूल्य कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए।
किसान हित में बड़ा कदम: खोखर
भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर ने कहा कि सपा सरकार ने किसानों को ठगने का काम किया। भाजपा ने पहले ही साल में दस रुपये बढ़ाकर किसान हितैषी होने की बात स्पष्ट कर दी है। सरकार का प्रथम लक्ष्य किसान हित है।