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क्रोध करने वाला मनुष्य मोक्ष नहीं पा सकता- अरूण मुनि

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बड़ौत (बागपत)।
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जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि क्रोध मनुष्य के अंदर भरें बारूद में चिंगारी लगा देता है, जिससे मन स्वाहा हो जाता है। स्वयं के द्वारा स्वयं को सजा देना ही क्रोध होता है।
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वे जैन स्थानक शहर में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हजारों सद्गुणों पर क्रोध रूपी अवगुण पानी फेर देता है। बड़े से बड़े संबंध क्रोध के कारण जरा सी देर में टूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि क्रोध करने वाला हमेशा नरक में जाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की ही बात नहीं संत पंथ एवं गृहस्थ क्रोध की निंदा तो करते हैं, परंतु उसे छोड़ने का मन नहीं करता। उन्होंने कहा कि मोक्ष की इच्छा रखने वाले कभी क्रोध से तमतमाते नहीं। अमृत का पान जिन्हें करना हो वे क्रोध रूपी विष की ओर जाते नहीं। जिसे असली चीज मिल जाए वह नकली की ओर क्यों जाए। इससे पूर्व अमन मुनि ने कहा कि क्रोध प्रीति की डोर को तोड़ देता है। दिखावट में साधना है। संयम है धर्म है परोपकार है मगर अंदर क्रोध की बारूद भरी पड़ी है। उसका कल्याण होना असंभव है। उन्होंने कहा कि सृष्टि के सारे रंग अपने अंदर समाहित कर लेने के कारण उसका रंग काला हो जाता है। धर्मसभा में धन कुमार, मनीष जैन, मनोज जैन, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, सतीश जैन, कालू जैन, शैलबाला, इंद्राणी, रेखा, कमलेश, अनुराधा, मोनिका, पूनम आदि उपस्थित रहे।
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