जीएसटी के भंवर में फंसा बाजार
बड़ौत (बागपत)। पहली जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) को लेकर बाजार से हलचल है। विशेषज्ञों का दावा है कि जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई की मार से त्रस्त जनता की मुश्किलें कम होंगी। फिलहाल बाजार में जीवनरक्षक दवाओं से लेकर कर के दायरे मेें आने वाली घरेलू वस्तुओं की कमी है। स्टॉक खाली करने के लिए ऑफर की बारिश की जा रही है।
नगर मेें कई जगहों पर जीएसटी लागू होने से पहले दवा का पुराना स्टॉक खपाने की होड़ मची है। मेडिकल स्टोर संचालक प्रभास जैन के अनुसार बड़ी कंपनियां हर महीने की अंतिम तारीख को थोक विक्रेता के साथ क्लोजिंग करती थी पर इस बार क्लोजिंग गत 20 तारीख को हो गई है। इसके चलते कुछ दवाओं की किल्लत है। फुटकर विक्रेता तो दवा खरीद ही नहीं रहे। कारण वर्तमान में दवाओं पर पांच और फूड सप्लीमेंट पर 14 प्रतिशत टैक्स है जबकि जीएसटी में दवाओं पर 12 से 28 प्रतिशत कर लगेगा। उधर, हौजरी कारोबार का कपड़ा बाजार जीएसटी के बाद मंहगा होने के आसार है।
कपड़ा व्यापारी सतेंद्र जैन का कहना है कि व्यापारी इसका विरोध जता चुके हैं। अब तक किसी सरकार ने कपड़े पर टैक्स नहीं लगाया था। मगर जीएसटी के बाद व्यापार पर असर पड़ेगा। उधर, जीएसटी लागू होने के बाद स्टॉक के सामान पर क्रेडिट को लेकर स्थिति साफ नहीं होने पर व्यापारी असमंजस में है। इसका फायदा ग्राहकों को हो रहा है। क्योंकि कई जगहों पर बाजारों मेें टीवी, फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन पर कई प्रतिशत तक छूट दी जा रही है।