बड़ौत (बागपत)।
चकबंदी से पीड़ित बामनौली के किसानों ने तहसील में प्रदर्शन किया और तहसीलदार को ज्ञापन देकर यहा यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे 15 मार्च के बाद तहसील में पीड़ित 28 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे।
चकबंदी में हुई धांधली के खिलाफ पीड़ित किसानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा गांव मे 1981 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, जो आज तक पूरी नहीं हो पाई। चकबंदी विभाग ने भूमाफिया से मिलकर छोटे किसानों की भूमि व गरीबों के पट्टे भूमाफिया के चेकों मे आवंटित कर अभिलेखों को क्षतिग्रस्त कर दिया, गांव के किसानों ने दिसंबर 2017 में लखनऊ मेें प्रशासन ने लखनऊ से स्तरीय जांच कमेटी गांव भेजी। जांच कमेटी ने संबंधित अभिलेखों मेें खामियां पायी और चकबंदी आयोग को रिपोर्ट दी । चकबंदी आयुक्त ने नौ जनवरी 2018 को डीएम को आदेशित कर उन्हें कर्मचारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया। 21 फरवरी 2018 को फिर उन्हेें डीएम से मिलकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जो कार्रवाई नहीं हुई गांव के किसान कृष्णपाल द्वारा तथा कथित आत्महत्या करने के संबंध में शिकायत पर कार्रवाई कर कोर्ट को आदेश दिया ,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जून 2018 मे पीड़ित किसानों ने लखनऊ मेें आमरण अशन की घोषण कर दी और चकबंदी आयुक्त से बातचीत की, डीएम को भेजे पत्र की प्रति लिपि प्रदर्शनकारी को दी और आश्वासन दिया, जिस पर अनशनकारियों ने अनशन समाप्त किया और वापस आए, लेकिन अभी तक कार्रवाई न होने पर उन्होंने तहसील पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन देकर चेतावनी दी कि यदि 15 मार्च तक कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित किसान तहसील पर आत्मदाह करेंगे। इस अवसर पर पीड़ित किसान महावीर, रत्ना, राजीव, कृष्णपाल, पीतम, ज्ञानेंद्र, राजपाल, महेंद्र सिंह, महेश पाल, सोनू, जयप्रकाश, जगमेंद्र, राम कुमार, बिजेंद्र, नरेश पाल, खिलारी सिंह, हरि सिंह, ब्रजा, रविंद्र, चाहराम, ओमप्रकाश, राजवीर, अमित, रामरत्न, तिलवीरा, सत्यपाल आदि रहे।