बागपत। बामनौली गांव में चकबंदी अधिकारियों ने नदी, नालों, स्कूलों और ग्राम समाज की भूमि को भी नहीं छोड़ा। इस पर भी चक काट कर किसानों को आवंटित कर दिए । किसान की मूल जोत की जमीन छीन गई, अब वे न्यायालय में इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन किसान को जमीन नहीं दी गई। जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हो चुका है।
बामनौली गांव के किसान जयदेव सिंह का कहना था कि चकबंदी अधिकारियों ने नदी, तालाब, खलिहान, पशुचर खाते, कब्रिस्तान, श्मशान, खेल का मैदान, बाग, प्राइमरी स्कूल, कन्या पाठशाला, आबादी, नाग देवता मंदिर आदि खातों में दर्ज ग्राम समाज की भूमि पर भी चक काट दिए और किसानों को भूमि आवंटित कर दी गई। किसान जमीन के लिए न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे हैं।
किसान विपेंद्र का कहना है कि सहायक चकबंदी अधिकारी स्तर पर चकबंदी कानून का उल्लंघन कर चक बनाए गए है और इन चकों को चकबंदी अधिकारी और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी स्तर पर भी कोई सुधार न करके नियम विरुद्ध इन चकों को बनाए रखा गया है। दोषी चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
किसान रामेंद्र सिंह का कहना है कि सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए भूमि आरक्षण के लिए भूमि कटौती त्रुटि पूर्ण तरीके से की गई है। औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। कब्रिस्तान को चक में आवंटित कर दिया गया।
किसान राज कुमार का कहना है कि सरकारी ट्यूबवेल को चक में आवंटित कर दिया। सांसद निधि द्वारा तैयार किए खड़ंजा को भी अनियमित रूप से उखाड़ दिया और चकों में आवंटित कर दिया। अनेक काश्तकारों को उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके मूल जोत से हटकर चक बनाए गए है। सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित व पूर्व में बंदोबस्त में अंकित भूमि को तहसील स्तर तथा चकबंदी विभाग स्तर पर छिन्न भिन्न कर ग्राम सभा और राजकीय संपत्ति को गंभीर क्षति पहुंचाई गई है। इसमें दोषी सभी चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रपति जी, चकबंदी ने कर दिए कंगाल
बागपत। बामनौली गांव निवासी पूजा ने राष्ट्रपति को पत्र भेज कर बताया कि तीन साल से जमीन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें जमीन नहीं मिली। चकबंदी ने उन्हें कंगाल कर दिया है। परिवार भुखमरी की कगार पर खड़ा है। अब उनके सामने आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं बचा। जमीन मिलने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। उन्हें उनकी जमीन दिलाई जाए।