बड़ौत (बागपत)।
मलकपुर चीनी मिल प्रशासन ने पेराई सत्र 2017-18 के तहत मिल को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है, इसके तहत मिल में सोमवार की रात में गन्ना तौल बंद कर दी जाएगी। दूसरी तरफ क्षेत्र में अभी भी खेतों में 30 प्रतिशत गन्ना खड़ा हैं। इससे क्षेत्र के गन्ना किसान परेशान हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से बकाया गन्ना भुगतान कराने और खेतों में गन्ना खड़ा रहने तक मलकपुर चीनी मिल को चालू रखने की मांग की।
जनपद के गन्ना किसानों की हालत किसी से छिपी हुई नहीं है। पिछले कई साल से क्षेत्र के किसान बकाया गन्ना भुगतान की मार से जूझ रहे हैं। फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी खेतों में खड़ा गन्ना और पिछले सत्र का बकाया गन्ना भुगतान है। हाल मेें ही किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री और गन्ना आयुक्त लखनऊ सहित गन्ना आयुक्त मेरठ से मिला। इस दौरान उन्हें आश्वासन दिया कि संबंधित चीनी मिल जब तक चलेगी, जब तक किसानों के खेतों में गन्ना खड़ा हुआ है,
दूसरी तरफ मलकपुर चीनी मिल ने पेराई सत्र 2017-18 के तहत बिना बकाया गन्ना भुगतान किए ही मिल बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। मिल बंद करने को लेकर सोमवार को शाम के समय मिल के मुख्य प्रबंधक (गन्ना) मुकेश मलिक से फोन पर बातचीत हुई। उन्होंने बताया सोमवार की रात में मिल में गन्ना तौल का कार्य बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित गन्ना क्रय केंद्रों के उखाड़ने के भी आदेश दे दिए गए हैं। मिल में रात में गन्ना तौल बंद होने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान परेशान हैं।
किसान पुष्पेंद्र चौहान ने कहा वर्तमान समय में किसान की आर्थिक हालत बहुत दयनीय है, उसे न तो वर्तमान गन्ने का भुगतान मिल रहा है और न ही बकाया गन्ना भुगतान। जबकि खाद, यूरिया सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। किसान हरपाल सिंह ने कहा किसानों की कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने गन्ना रहने तक मिल चालू रखने की मांग की। किसान अमित कुमार ने कहा अधिकांश जगहों पर क्षेत्र मेें स्थित चीनी मिलों के गन्ना क्रय केंद्र उखड़ने लगे हैं, इससे मजबूरन किसानों का अपना गन्ना सस्ते दामों मेें कोल्हू मेें देने पड़े रहे हैं। यह अन्याय है। किसान ब्रजवीर ने भी बकाया गन्ना भुगतान सहित वर्तमान सत्र का भुगतान और खेतों में गन्ना खड़ा रहने तक मिल को चालू रखने की मांग उठाई।