सियासत के महारथी, खाप पंचायतों के सारथी
बागपत। वेस्ट यूपी के सिरमौर नेताओं में शुमार रहे बाबू हुकुम सिंह की जितनी स्वीकार्यता सियासत में रही, उतना ही आदर खाप चौधरियों के बीच पंचायतों में भी मिला। परिवार में कैराना की कलस्यान गुर्जर खाप की चौधराहट है। पहले उनके भाई चौधरी थे और वर्तमान में भतीजे रामपाल सिंह इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। खाप पंचायतों में उनकी भागीदारी हमेशा बनीं रही। किसान बिरादरी ने उन पर हमेशा भरोसा किया।
कैराना की कलस्यान गुर्जर खाप के चौधरी स्वर्गीय मान सिंह के घर में जन्मे थे हुकुम सिंह। सामाजिकता के संस्कार बचपन से मिले। उनके बड़े भाई स्वर्गीय मुखत्यार सिंह अपनी खाप के चौधरी बने। वर्तमान में बाबू हुकुम सिंह के भतीजे रामपाल सिंह इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। वकालत के बाद उन्होंने राजनीति की सीढ़ी चढ़ी, लेकिन हमेशा समाज और पंचायतों से जुड़े रहे। भाकियू अध्यक्ष स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के आंदोलनों में भी वह किसानों के साथ खड़े रहे और लखनऊ में किसानों का पक्ष रखा। किसान उन पर भरोसा करते थे, यही वजह है कि भाकियू की खास पंचायतों के फैसले की घड़ी में वह भी हमेशा मौजूद रहे। सौरम में हुई एतिहासिक खाप पंचायत में वह शामिल हुए थे। वह सियासत में आगे बढ़े, लेकिन कभी अपने सामाजिक दायित्वों से पीछे नहीं रहे।
देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि नए दौर की राजनीति के लिए वह प्रेरणा बने रहेेंगे। राजनीति जरूर की, लेकिन समाज और किसान को कभी भी नहीं भूले।
चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष का कहना है कि वह सामाजिक दायित्वों को कभी नहीं भूले। समाज हित की हमेशा बात की। नए दौर में इस तरह के व्यक्तित्व कम ही मिलते हैं।
भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि वह ऐसे जनप्रतिनिधि रहे, जिन पर किसान आंख बंद कर यकीन करते थे। उनकी बात में कभी इंच भर का भी फर्क नहीं आता था।