रमाला (बागपत)। जिवाना गांव के किसान के बेटे मोहित गौड़ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक बटोरे। देश का नाम ऊंचा किया, लेकिन होनहार खिलाड़ी को अब तक किसी ने शाबाशी तक नहीं दी। आर्थिक परेशानी झेल रहे शूटर का परिवार किसी तरह उसे अभ्यास कराने के लिए रेंज तक भेजता है, लेकिन खेलों को बढ़ावा देने की बात करने वाला सिस्टम को मोहित की मेहनत नजर नहीं आ रही है।
जिवाना गांव के किसान वीरेंद्र शर्मा के बेटे मोहित गौड़ ने वर्ष 2015 में आठवें एशियाई खेलों की 10 मीटर पिस्टल प्रतिस्पर्धा के व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य और टीम वर्ग में सिल्वर पदक जीता। इसी साल कुवैत में व्यक्तिगत स्पर्धा में वह चौथे स्थान पर रहा, जबकि टीम वर्ग में गोल्ड हासिल किया। सातवें एशियाई खेलों में भी वह भाग ले चुका है। नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर मोहित ने कई पदक जीते, लेकिन से प्रोत्साहन नहीं मिला। किसान वीरेंद्र शर्मा कहते हैं कि प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण उनके लिए अब अभ्यास कराना तक मुश्किल हो गया है। सूबे के ख्ेाल मंत्री चेतन चौहान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके खिलाड़ियों को पेंशन देने का एलान किया था, लेकिन अभी तक पेंशन नहीं दी गई मोहित रोजाना अभ्यास के लिए गांव से बड़ौत तक जाता है। साईं ने भी उसे अभ्यास कराया, लेकिन नौकरी तक नहीं मिली। परिवार का कहना है कि खेल विभाग को उसके प्रशिक्षण, प्राइज मनी और नौकरी का इंतजाम करना चाहिए।