राशन नहीं, इंसाफ चाहिए
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में चकबंदी से आहत किसान के आत्महत्या करने के मामले में परिवार के अनशन पर बैठने के बाद प्रशासन की ओर से घर पर राशन तो भिजवा दिया है। लेकिन परिवार का कहना है कि अभी जमीन से जुड़ा मामला नहीं सुलझा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें राशन नहीं चाहिए, उनकी जमीन की सही चकबंदी कराई जाए।
बता दें कि बामनौली गांव में गलत तरीके से चकबंदी से आहत होकर किसान कृष्णपाल ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। किसान की मौत के बाद उसके परिवार ने अन्न और जल त्याग दिया था और इंसाफ की गुहार लगाई थी। किसान की पत्नी सुमन की हालत बिगड़ने पर शुक्रवार को एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने गांव पहुंच आश्वासन देकर अनशन समाप्त करा दिया था। एसडीएम द्वारा दिए गए आश्वासन पर शनिवार को किसान के घर पर 50 किलो गेहूं और 50 किलो चावल भिजवाए गए। लेकिन सुमका कहना है कि राशन देकर प्रशासन उन्हें बहका रहा है। गलत चकबंदी के कारण उसकी पति की जान चली गई। लेकिन अभी तक उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
डीएम द्वारा दिए गए निर्देश के बाद भी आज तक उनके पास कोई भी चकबंदी अधिकारी नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमें गेहूं और चावल नहीं चाहिए, हमें तो इंसाफ चाहिए। गलत तरीके से आठ बीघा जमीन की गई चकबंदी को ठीक कराया जाए और उन्हें एक ही जगह आठ बीघा जमीन का चक दिलाया जाए। यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे फिर से अनशन पर बैठ जाएंगे। उन्होने यह भी बताया कि कृष्णपाल ने चार अप्रैल 2017 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जमीन की चकबंदी सही तरीके से कराने की मांग की थी। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।