अमीनगर सराय (बागपत)। निकाय चुनाव लड़ने के तौर-तरीके में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। धन बल पर वोट ली जाती है। अब तो लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। शराब के चलन ने मटियामेट कर दिया है। पहले मोहल्ले के जिम्मेदार लोग ही वोटरों से मतदान कराते थे। वोटर खुद अपना समर्थन करते थे। प्रत्याशियों का न तो शराब पर खर्च होता था और ने दावतों का। मतदाताओं की सिर्फ आवभगत होती थी। सराय के मुख्य बाजार के वोटर अड्डे पर चुनावी चर्चा हुई।
अजीज ने बताया जब उन्होंने पहली बार वोट दिया तब चुनाव का कोई शोरगुल नहीं होता था। इक्का-दुक्का जगह पोस्टर लगे मिलते थे। पहले न तो इतना प्रचार होता था और न ही दावतों चलती थी।
वीर सैन यादव ने कहा पहले प्रत्याशी वोटरों से एक बार मतदान करने की अपील और परिवार के मुखिया से सहयोग मांगते थे। उसके बाद पूरा समर्थन उसे मिल जाता था।
नौशाद अली ने बताया पहले के दौर में प्रत्याशी वोट के लिए सादगी के साथ प्रचार-प्रसार किया करते थे। हाथ उठाकर वोटों की अपील होती थी। जनता को पूरा सहयोग मिलता था। अब चुनाव भी आधुनिक हो गया है।
महबूब ने कहा पहले खुद लोग प्रत्याशी की आव भगत करते थे। शरबत और घर में बनी मिठाई बंटवाकर मोहल्ले के लोग उसका समर्थन करते थे। अब प्रत्याशी ही शराब बंटवा रहे है। उनके यहां खाने-पीने की होड़ लगी है।