बड़ौत (बागपत)। चौधराण पट्टी स्थित मंदिर में श्रीराम कथा में सोमवार को दंडी स्वामी प्रेम नारायण आश्रम महाराज ने कहा कि जन्माष्टमी तो वास्तव में तब होगी जब हमारे अंदर के कृष्ण का प्राकट्य होगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य किसी भी धर्म का अनुयायी हो मगर कंस, शिशुपाल, दंत वर्त, चाणूर व मुष्टिक आदि राक्षस हमारे अंदर क्रोध, ईर्ष्या, मोह व लोभ आदि के रूप में बैठे हैं। व्रत, कथा श्रवण और सत्संग वे साधन हैं, जिसके द्वारा इनका शमन होता है और आंतरिक शक्ति को बल मिलता है, जिससे हमें उसका अनुभव होता है।
व्रत का अर्थ केवल अन्न मात्र का त्याग नहीं है, अपितु समस्त इंद्रियों का संयम है। दूसरों की निंदा न करना, अपने कानों से किसी की निंदा न सुनना यह इंद्रियों का व्रत है। आंखों से परस्त्रियों के दर्शन न करना, हाथों से परोपकार करना, पैरों से पवित्र स्थान पर जाना आदि नियम अपने जीवन मे साकार रूप से अपनाएं तो सच्चा व्रत है। उन्होंने कहा कि बुरी आदतों से मुक्ति ही व्रत का लक्ष्य है। कथा में सुभाष शर्मा, वेदप्रकाश शर्मा, यशपाल शर्मा, राकेश शर्मा, संजय पठान, सौरव शर्मा, राकेश शर्मा, पं. रामकिशन शर्मा, बिजेंद्र शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, सुनील भारद्वाज, अलका शर्मा, मायादेवी, केला देवी, अनिता शर्मा, संतोष शर्मा, सरल देवी, रेखा, मिथलेश आदि ूरहे।