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बागपत में घोड़े को दिया मौत का इंजेक्शन, विरोध

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बागपत। घोड़ों और खच्चरों में होने वाली जानलेवा ग्लैंडर्स बीमारी से पीड़ित एक घोड़े को मौत का इंजेक्शन दे दिया गया। घोड़ा मालिकों के विरोध के चलते अश्व अनुसंधान की टीम और पशु चिकित्सकों को वापस लौटना पड़ा। घोड़ों की दोबारा सैंपलिंग कर हिसार जांच के लिए भेजी है। दोबारा पुष्टि होने के बाद ही अन्य घोड़ों को भी मौत का इंजेक्शन दिया जाएगा।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि बागपत के ईंट भट्ठे पर शामली के एक परिवार के तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स के लक्षण दिखाई देने पर सैंपल जांच के लिए भेजे थे। तीनों घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हो गई । जिले में कुल नौ घोड़ों को ग्लैंडर्स की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार के डॉ. हरिशंकर, लैब टेक्नीशियन सीताराम, सीवीओ डॉ. राजपाल सिंह टीम के साथ ईंट भट्टे पर पहुंचे। घोड़ा मालिकों को घोड़े की बीमारी की जानकारी दी। घोड़े को मौत का इंजेक्शन लगाने की जानकारी मिलते ही मजदूरों ने विरोध शुरू कर दिया। बामुश्किल एक मजदूर तैयार हुआ, इसके बाद उसके पीड़ित घोड़े को जहर का इंजेक्शन दे दिया गया और उसे मिट्टी में दफना दिया गया। अन्य घोड़ों की दोबारा सैंपलिंग कर जांच के लिए हिसार भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एनीमल रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. प्रवीण मलिक ने भी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

कंट्रोल एरिया घोषित हो चुका बागपत
बागपत। जिले में हाई अलर्ट के बाद घोड़ों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। ईंट भट्ठों पर अभियान चलाकर घोड़ों के सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। अब तक 109 घोड़ों के सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार भेजे जा चुके हैं। ग्लैडर्स घोड़ों और खच्चरों में पाई जाने वाली बीमारी है। जनपद में 450 से अधिक ईंट भट्ठे हैं।
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जहर का इंजेक्शन देने का है कानून
बागपत। सीवीओ डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि विभाग ने इस बीमारी पर वर्ष 2009 में एक्ट बनाया , इसमें ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़ों को जहर का इंजेक्शन लगाए जाने का प्रावधान है। इसके तहत ही जांच के बाद संबंधित घोड़े को इंजेक्शन लगाया जाता है।

कैसे चलेगी मजदूरी, कहां से लाएंगे घोड़े
बागपत। भट्टे पर मजदूरी करने वाले राज कुमार, आशु, संदीप, रोहित, रमेश, आश मोहम्मद, इंद्रजीत फुगाना, शमीत, नरेंद्र का कहना था कि वह मजदूर आदमी है। विभाग की ओर से मुआवजा केवल 25 हजार दिया जाता है और घोड़े की कीमत लाखों में होती है। ऐसे में वह कैसे अपना घर चला पाएंगे।
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