बागपत। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद सियासी पारा गरम है। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला पर भाजपा के पाले में खड़ा होने का आरोप लगा, इसके बाद उन्हें रालोद से निष्कासित कर दिया। यह पहला मौका नहीं है, जब चौधरी अजित सिंह किसी विधायक के दांव पर चित हुए हो। वर्ष 1989 में उनके नजदीकी कई विधायकों की दगाबाजी के चलते चौधरी प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। बाद में उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री के पद से ही संतोष करना पड़ा था।
छपरौली के विधायक की क्रॉस वोटिंग के कारण महा गठबंधन में रालोद की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। यही वजह रहे कि छोटे चौधरी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया, लेकिन सियासत के पुराने पन्ने पलटें तो एक ऐसा वाक्या वर्ष 1989 में भी हुआ, जब चौधरी अजित सिंह को उनके ही विधायकों ने हमेशा के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर कर दिया। असल में गठबंधन से लड़े गए चुनाव में मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़ में दो नेता थे। एक थे मुलायम सिंह और दूसरे चौधरी अजित सिंह। लखनऊ में विधायकों की परेड कराई गई। सीएम चुनने के लिए पर्यवेक्षक बनाए थे पूर्व गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद, मधु दंडवते और गुजरात के चिमन भाई पटेल। नतीजे मुलायम सिंह के पक्ष में आए और चौधरी अजित सिंह को केंद्र में कैबिनेट मंत्री के पद से संतोष करना पड़ा। चौधरी अजित सिंह की हार की वजह बने थे, उनकी ही करीब सात विधायक। इनमें पांच ने क्रॉस वोट दिए थे, जबकि दो ने मुलायम सिंह के पक्ष में मतदान किया था। राज्यसभा चुनाव के प्रकरण के बाद सियासी गलियारों में पुराने जख्म भी कुरदे जाने शुरू हो गए हैं।
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने साध ली चुप्पी
बागपत। विधायक सहेंद्र सिंह रमाला की ओर से लगाए गए आरोपों पर रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने चुप्पी साध ली। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वह कुछ नहीं बोलना चाहते हैं। बसपा को वोट नहीं देने और भाजपा से गठबंधन की बातें चलाने के आरोपों पर भी छोटे चौधरी चुप रहे।
कौन से लक्ष्य के लिए सहेंद्र सिंह ने बदला निशाना
बागपत। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने पहले वोट बसपा को दिया और फिर भाजपा को। नतीजा वोट निरस्त हो गया। सवाल है कि आखिरकार सहेंद्र सिंह रमाला ने किसके इशारे पर क्रॉस वोट किया। खुद विधायक इस पर बोलने से कतरा रहे हैं। माना यह भी जा रहा है कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। कुछ लोग उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की बात कह रहे हैं तो कुछ का दावा है कि उन्हें लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट मिल सकता है। सवाल है कि आखिर कौन से लक्ष्य के लिए उन्होंने अपना निशाना बदल दिया।
रमाला का गांव-गांव में विरोध शुरू
बागपत। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला का कई गांव में विरोध शुरू हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे सहेंद्र सिंह से रालोद के कट्टर समर्थक और कई गांवों के ग्रामीण नाराज है। यही वजह रही है कि रविवार को वह सीधे चंडीगढ़ से अपने गांव रमाला पहुंचे और हालात का जायजा लिया। एक तरफ रालोद भविष्य की राजनीति साधने में लगा है तो दूसरी तरफ सहेंद्र सिंह हालात पर निगाह रखे हुए हैँ।